शाही स्नान ने सिमरिया महाकुंभ का लिख दिया शाही इतिहास, 30 लाख लोगों ने लगाई आस्था की डुबकी

शाही स्नान ने सिमरिया महाकुंभ का लिख दिया शाही इतिहास, 30 लाख लोगों ने लगाई आस्था की डुबकी

By: Anurag Goel
November 09, 11:11
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BEGUSARAI : सिमरिया महाकुंभ के तीसरे और अंतिम पर्व (शाही) स्नान ने पिछले सारे रिकार्ड तोड़ दिए. मोटे अनुमान के तौर पर देर शाम तक 30 लाख से अधिक लोगों ने कुंभ स्नान किया.तीसरे पर्व (शाही) स्नान में विशेष रूप से केन्द्रीय मंत्री अश्विनी चौबे शामिल रहे।

कई सौ वर्षों बाद पुनर्जीवित हुआ सिमरिया महाकुंभ तीसरे और अंतिम पर्व (शाही) स्नान के साथ ही समापन की ओर है। बीते 17 अक्टूबर को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने देश भर से जुटे संत-महात्माओं की उपस्थिति में सिमरिया महाकुंभ का विधिवत उद्घाटन किया था। उन्होंने कहा था कि सिमरिया, बेगूसराय और बिहार के लोग संकल्पित हैं तो फिर सरकार भी उनके साथ है।

19 अक्टूबर दीपावली के दिन पहला पर्व (शाही) स्नान हुआ। इसमें लगभग 5 लाख की संख्या में लोग जुटे। इस बीच छठ पर्व में सिमरिया घाट पर लोगों का तांता लगा रहा। 29 अक्टूबर को अक्षय नवमी के दिन हुए दूसरे पर्व (शाही) स्नान में मोटे अनुमान के तौर पर 20 लाख के आसपास लोगो ने गंगा में डुबकी लगायी।

4 अक्टूबर को कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर पिछले सभी रिकार्ड को तोड़ते हुए 20 लाख से अधिक लोगों ने सिमरिया के पावन तट पर स्नान किया। कार्तिक का महीना सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इस दौरान प्रतिदिन के हिसाब से लगभग डेढ से दो लाख लोगों ने स्नान किया। वैसे तो 5 अक्टूबर को कल्पवास की शुरूआत के साथ ही कुंभ का प्रारंभ मानते है। इस तीसरे पर्व स्नान को मिल दें तो अभी तक सवा करोड से अधिक लोगों के सिमरिया महाकुंभ में स्नान करने का अनुमान है। 16 नवंबर को ध्वजोत्थान के साथ ही इस संख्या के और बढ़ने का अनुमान है।

तीसरे पर्व (शाही) स्नान में भी द्वादश कुंभ पुनर्जागरण प्रेरणा पुरूष करपात्री अग्निहोत्री परमहंस स्वामी चिदात्मन जी महाराज की अगुआई में कुंभ शोभा यात्रा निकली। तीसरे पर्व (शाही) स्नान में विशेष रूप में दिल्ली से पधारे केन्द्रीय मंत्री अश्विनी चौबे साथ रहे।

कुंभ शोभा यात्रा में कुंभ की शान माने जाने वाले नागा साधु सबसे आगे रहे। पंच दशनाम जूना अखाड़ा से जुटे ये नागा साधु यात्रा में तलवार, भाले, त्रिशूल आदि से करतब दिखाते चले। नागा संन्यासियों का स्नान भी सबसे पहले हुआ। इनके साथ ही नागा साध्वियों का जत्था भी साथ था। नागा संन्यासियों के पीछ दंडी स्वामियों का दल था। इनके साथ ही अलग-अलग रथों पर भारत माता का चित्र, पंच देवताओं का चित्र शोभायमान था।

अखाड़ों से जुटे संन्यासियों और साधु संतों के बाद सर्वमंगला परिवार के देश भर से जुटे 56 पीठाधीश्वरों के साथ कुंभ पुनर्जागरण के प्रेरणा पुरुष करपात्री अग्निहोत्री परमहंस स्वामी चिदात्मन जी महाराज चल रहे थे। सर्वमंगला परिवार के प्रधान व्यवस्थापक स्वामी चिदानंद जी महाराज, पीठाधीश्वरों में प्रयाग पीठाधीश्वर स्वामी माधवानंद जी महाराज, हरिद्वार पीठाधीश्वर स्वामी गंगानंद जी महाराज, पुनौराधाम के स्वामी उमेशानंद जी महाराज, स्वामी नारायणा नंद जी महाराज, स्वामी प्रेम तीर्थ जी महाराज, स्वामी सत्यानंद जी महाराज,स्वामी विभूत्यानंद जी महाराज, स्वामी सुनीलानंद जी महाराज, स्वामी उदयनानंद जी महाराज सहित देश भर से जुटे 56 पीठाधीश्वर शामिल थे।
आठ महिला नागा संन्यासिनी तीसरे पर्व (शाही) स्नान की शोभा यात्रा में साथ रहीं। इनमें कृष्णागिरी जी, किरणगिरी जी, गिरिजागिरी, माहीगिरी, जमातिया मंहत भगवानागिरी जी, जमातिया मंहत सौहाद्रीगिरी जी, जमातिया मंहत उमागिरी जी, जमातिया मंहत त्रिजटागिरी जी शामिल हैं।

नागा संन्यासियों में श्री दिगंबर तोतापुरी जी महाराज, महंत विपिनपुरी जी महाराज, शंकरपुरी जी महाराज, राजुपुरी जी महाराज, विक्रमानंद सरस्वती जी महाराज, संतोषपुरी जी महाराज, अर्जुनपुरी जी महाराज, रोहितानंद सरस्वती जी महाराज, माधवानंद सरस्वती जी महाराज, अवधेशपुरी जी महाराज, संतोषगिरी जी महाराज, शिवगिरी जी महाराज, मोहनगिरी जी महाराज, लोहापुरी जी महाराज, अभिमन्युपुरी जी महाराज, गोविंदपुरी जी महाराज, श्यामपुरी जी महाराज, सुखवासीपुरी जी महाराज, महंत नागदेवपुरी जी महाराज, महंत जर्नादनगिरी जी महाराज, महंत गंगागिरी जी महाराज, थानापति राज राजेश्वरानंद गिरी जी महाराज शामिल हैं।
नाथ संप्रदाय के संतों में महंत समुद्रनाथ जी महाराज, संजीवानंद जी महाराज, महंत शिवभरणगिरी जी महाराज, महंत नाराय़णगिरी जी महाराज, महंत बुद्धिगिरी जी महाराज, महंत पुरणगिरी जी महाराज, महंत लखनगिरी जी महाराज, महंत राकेश भारती कोतवाल जी महाराज, महंत पर्वतगिरी जी महाराज, ललितपुरी जी महाराज, भरतपुरी जी महाराज, बलरामगिरी जी महाराज, कृष्णापुरी जी महाराज, बाबूपुरी जी महाराज, सुमनपुरी जी महाराज, हनुमानपुरी जी महाराज, दिनेशपुरी जी महाराज, सेवादास जी महाराज, देवभूमि जी महाराज और संकादास जी महाराज साथ थे।

दंडी स्वामियों के दल में नैमिषारण्य से श्रीरामदेव आश्रम जी महाराज, दिनेश आश्रम जी महाराज, श्री लक्ष्यश्रेष्ठ आश्रम जी महाराज, श्री शंकर आश्रम जी महाराज, श्री सुरेश आश्रम जी महाराज, श्री शम्भू आश्रम जी महाराज, श्री देवेन्द्राश्रम जी महाराज, श्री दयालु आश्रम जी महाराज, श्री कमलेश आश्रम जी महाराज, श्री वेद प्रकाश आश्रम जी महाराज, श्री गंगानन्द आश्रम जी महाराज, श्री किशन आश्रम जी महाराज, श्री राजेश आश्रम जी महाराज एवं श्री सीताराम आश्रम जी महाराज साथ थे।
तीसरे पर्व स्नान को सफल बनाने के लिए कुंभ सेवा समिति और जिला प्रशासन ने पूरा जोर लगाया। कार्तिक स्नान के दिन भगदड़ की घटना और कई किलोमीटर लंबे जाम को देखते हुए और दुरूस्त व्यवस्था की तैयारी की। तीसरे पर्व स्नान के साथ ही सिमरिया का स्थान आदिकुंभ स्थली और देश के पांचवें कुंभ के रूप में देश-दुनिया में प्रमुख रूप से स्थापित हो गया है।

 

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