यहां आकर कैद हो जाते हैं भूत-प्रेत, पिंडदान से उन्हें मिलती है मुक्ति

यहां आकर कैद हो जाते हैं भूत-प्रेत, पिंडदान से उन्हें मिलती है मुक्ति

By: Anurag Goel
September 09, 12:09
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Gaya : हादसा हो या हत्या। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अप्राकृतिक मौत के बाद इंसान की आत्मा भटकती रहती है। ये आत्माएं कई बार लोगों का जीना मुश्किल कर देती हैं।

भूत हो या प्रेत सभी आत्माएं मुक्ति मिलने से पहले कष्ट भोगने को विवश होती हैं। धर्म नगरी गया में एक जगह ऐसा है जहां इन आत्माओं को मुक्ति मिलती है। लोग यहां भूत प्रेत को लेकर आते हैं और उनसे मुक्त होकर जाते हैं।

यहां कैद होकर रह जाते हैं भूत-प्रेत...
- गया के प्रेत शिला पर लोग प्रेत बाधा से मुक्ति पाने के लिए आते हैं। पितृ पक्ष के दौरान यहां रोज हजारों लोग पिंड दान करने आ रहे हैं। यहां अधिकतर ऐसे लोग आते हैं, जिनके किसी अपने की अप्राकृतिक मौत हो गई हो।
- प्रेत शिला के पंडित मनोज कहते हैं कि यहां आने के बाद भूत प्रेत कैद होकर रह जाते हैं। मुख्य गेट के पर मां काली का स्थान है। उनके डर से कोई आत्मा वापस जाने की हिम्मत नहीं करती।

- पहाड़ की चोटी पर स्थित प्रेत शिला पर पिंड दान करने के लिए उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों से लोग आते हैं। जो लोग प्रेत बाधा से परेशान होते हैं वे यहां आकर शांति पाते हैं।
- मनोज कहते हैं कि मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से कई लोग बांस का डंडा लेकर आते हैं। इसकी भी एक वजह है। भूत प्रेत से परेशानी होने पर तांत्रिक आत्मा को एक डंडे में कैद कर देते हैं।
- लोग उस डंडे को प्रेत शिला लेकर आते हैं और उसे ब्रह्म कुंड में डाल देते हैं, जिससे प्रेत यहीं रह जाए।

वृद्ध और लाचार लोगों के लिए कांवर सेवा

- प्रेत शिला पहाड़ की चोटी पर स्थित है। यहां पिंड दान करने के लिए दो स्थान हैं। एक पहाड़ के नीचे और दूसरा चोटी पर। कुछ लोग पहाड़ के नीचे मैदान में बैठकर पिंडदान करते हैं और कुछ लोग पहाड़ की चोटी पर जाकर पिंड दान करते हैं। इसके लिए खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है।
- शरीर से सक्षम लोग तो सीढ़ी चढ़कर चोटी तक पहुंच जाते हैं, लेकिन जो लोग कमजोरी या अधिक उम्र के चलते ऐसा नहीं कर पाते वे कांवर सेवा का इस्तेमाल करते हैं।

 

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