कभी यहां राम-लक्ष्मण ने विश्वामित्र के साथ खाई थी लिट्टी, दिखा ऐसा नजारा

कभी यहां राम-लक्ष्मण ने विश्वामित्र के साथ खाई थी लिट्टी, दिखा ऐसा नजारा

By: Sudakar Singh
November 13, 01:11
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Buxar : पंचकोशी परिक्रमा के पांचवें व अंतिम दिन श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान करने के बाद महर्षि विश्वामित्र आश्रम में पहुंच कर पूजा-अर्चना की। इसके बाद चरित्रवन में लिट्‌टी-चोखा का प्रसाद ग्रहण किया। ऐसा माना जाता है कि यहां महर्षि विश्वामित्र ने भी भगवान श्रीराम व लक्ष्मण के साथ पंचकोशी परिक्रमा के अंतिम दिन लिट्‌टी-चोखा का प्रसाद ग्रहण किया था। इस परंपरा को निर्वहन सदियों से श्रद्धालु करते आ रहे हैं। मेले में आसपास के कई जिलों व राज्यों से पहुंचे लोगों ने लिट्‌टी-चोखा बनाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया।

 पंचकोशी परिक्रमा समिति के सचिव डॉ रामनाथ ओझा ने कहा कि कोई भी यात्रा या परिक्रमा तभी पूर्ण होती है, जब वह पुनः उसी बिंदु पर आकर समाप्त हो जाए। उन्होंने बताया कि पांच दिनों पहले से शुरू हुई पांच कोस की यात्रा में विभिन्न ऋषियों के आश्रम से लौटने के पश्चात् महर्षि विश्वामित्र के आश्रम में लिट्टी-चोखा खिला कर प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण का स्वागत किया गया था। चरित्रवन स्थित महर्षि विश्वामित्र के आश्रम में भोजन के पश्चात भगवान ने बसांव मठिया के पास स्थित विश्राम कुंड के पास रात्रि विश्राम किया था। अगले दिन प्रातः काल में उनकी विदायी की गयी थी। इस दौरान स्वामी अच्युत प्रपन्नाचार्य जी महाराज, कुलेश्वर कमलनयना चार्य महाराज उद्धव प्रपन्नाचार्य सुर्दशनाचार्य विश्वकसेन दास अवधेश तिवारी उमा पांडेय शिवाकांत मिश्र उदय कुमार दूबे आदि रहे।


 श्रद्धालुओं की भीड़ व लिट्‌टी-चोखा बनाने को लेकर चरित्रवन व किला मैदान समेत आसपास का इलाका सुबह से शाम तक धुएं के गुबार में ढंका रहा। आलम यह रहा कि इस इलाके से गुजरने वाले लोगों के आंखों में जलन की वजह से आंसू आ गए। श्रद्धालु नाथबाबा मंदिर, चरित्रवन, किला मैदान समेत अन्य जगहों पर लिट्‌टी-चोखा बनाने में जुटे रहे। कई लोगों ने गंगा घाट के किनारे हीं लिट्‌टी बनाना शुरू कर दिया। इसके अलावे जिले भर में लोगों ने अपने घरों में भी लिट्‌टी-चोखा बनाया।
 
इस भीड़ में किला मैदान के सामने स्थित दरगाह दरिया शहीद परिसर में सैकड़ों की संख्या में महिलाएं और पुरुष लिट्टी-चोखा बना रहे थे। पंचकोशी परिक्रमा के पांचवें दिन अहले सुबह ही दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने रामरेखा घाट पर गंगा स्नान करने के बाद लोग किला मैदान, नाथ मंदिर, एमवी कॉलेज, नौलखा मंदिर, परिसदन, नहर कॉलोनी, गंगा पम्प नहर कार्यालय समेत नगर के चरित्रवन स्थित अन्य जगहों पर लिट्टी बनाने में लग गए।
 
दरगाह पर रहने वाले लोग भी जरूरतमंदों की मदद कर रहे थे। उन्हें खाना बनाने और पीने के लिए पानी आदि उपलब्ध करा रहे थे। शहर की शान में कहीं बट्टा न लगे। इसके लिए हर सक्षम व्यक्ति ने अपने स्तर से मदद की। आपसी तालमेल ने इस त्योहार के आनंद को दूना कर दिया। धर्म और मजहब किसी को बैर करना नहीं सीखाते, यह बात सच होती दिखी।
 
पंचकोशी की परंपरा का निर्वाह लोगों ने धार्मिक महत्व के अनुसार किया। शनिवार के पड़ाव बड़का नुआंव से चरित्रवन आने के क्रम में श्रद्धालुओं ने सेंट्रल जेल के पास स्थित वामन भगवान मंदिर में भगवान की पूजा-अर्चना की। मिथलेश पांडेय ने कहा कि लोगों ने जमकर खरीदारी की। वहीं प्रियंका पाठक, बिट्‌टु, पिंकी आदि ने कहा कि लोग उत्साह के साथ परंपरा को निभाते हैं।

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