इस दिवाली बच्चों के लिए ये गिफ्ट करें सेलेक्ट, फ्यूचर के लिए होगा फायदेमंद

इस दिवाली बच्चों के लिए ये गिफ्ट करें सेलेक्ट, फ्यूचर के लिए होगा फायदेमंद

By: Anurag Goel
October 19, 02:10
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Live Bihar Desk : दिवाली के इस शुभ अवसर पर आप अपने बच्चों के फ्यूचर को सिक्योर करने के लिए उन्हें एसआईपी (सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) या फिर कोई म्युचूअल फंड गिफ्ट कर सकते है, क्योंकि शेयर बाजार में तेजी का सिलसिला जारी है। इस साल अभी तक सेंसेक्स और निफ्टी ने 21 फीसदी तक का रिटर्न दिया। इन जबरदस्त रिटर्न का फायदा उठाने के लिए आपके पास यह बड़ा मौका है।
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि म्यूचुअल फंड का पैसा भी बाजार में ही लगता है, लेकिन इसमें ये काम आपके लिए एक जानकार करता है जिससे बाजार का जोखिम कम हो जाता है।

म्यूचुअल फंड चुनाव
सबसे पहले तो आपको ये तय करना है कि आपके निवेश का मकसद क्या है, आप कितना निवेश कर सकते हैं और कितने समय के लिए इसमें बने रह सकते हैं। अगर आपको साल-दो साल के लिए निवेश करना है, तो उसके लिए अलग म्यूचुअल फंड होंगे। अगर आपको 5, 7, 10 साल या इससे भी ज्यादा समय के लिए निवेश करना है, तो उसके लिए दूसरे म्यूचुअल फंड होंगे।

मतलब साफ है कि सही म्यूचुअल फंड का चुनाव इसी बात पर निर्भर करता है कि आपकी निवेश अवधि क्या है। मिसाल के लिए, अगर आप छोटी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं, तो आप डेट फंड या लिक्विड फंड चुन सकते हैं। वहीं अगर आप लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं, तो फिर आपके लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड सही रहेंगे।

अच्छे फंडस चुनने का तरीका

बाजार में हजारों म्यूरचुअल फंड स्कीम्स् चल रही हैं। सभी दावा करती हैं कि वे सबसे अलग हैं। यही कारण है कि निवेशक बिना सोचे-समझे म्यूचुअल फंड का चयन कर लेता है, जो कि आगे चलकर समस्या बन जाता है। हम आपकी इस समस्याअ का हल यहां पर करेंगे। आप सिर्फ कुछ नियमों का पालन कर अच्छे‍ म्यूचुअल फंड का चुनाव कर निवेश कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड के चयन में चार बातों को ध्यान में रखना होता है- परफॉर्मेंस, रिस्कड, मैनेजमेंट और कॉस्ट ।

परफॉर्मेंस
जानकारों का कहना है कि आप सेब और संतरे की तुलना नहीं कर सकते, भले ही दोनों फल हैं। ठीक इसी प्रकार दो म्यूचचुअल फंड की तुलना करना आसान नहीं होता। आप इक्विटी फंड की तुलना डेट फंड से या इनकम फंड की ग्रोथ फंड से नहीं कर सकते। लिहाजा किसी भी म्यूचुअल फंड की तुलना करने से पहले उनके प्रारूप को ध्यांन से देख लें। समान प्रारूप वाले फंड की ही तुलना की जा सकती है। अलग-अलग कंपनियों के समान प्रारूप के म्यूचुअल फंड की तुलना करते वक्तं बाजार में उनकी परफॉर्मेंस देखें। जो बाजार में अच्छाब चल रहा हो, उसी को चुने। लेकिन हां यहां भी आंख मूंद कर फैसला न करें। इसके रिस्कर फैक्टफर को ध्याीन से पढ़ें।

पिछला प्रदर्शन जरूर देखें

वैसे तो इस बात की गारंटी नहीं होती कि अगर किसी फंड ने अब तक अच्छा परफॉर्म किया है तो आगे भी उसका परफॉर्मेंस वैसा ही रहेगा। लेकिन अलग-अलग फंड्स के पिछले प्रदर्शन से आप एक तुलनात्मक अध्ययन कर सकते हैं कि किस फंड के परफॉर्मेंस में एक कंसिस्टेंसी है, और उसके प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव बाजार और इकोनॉमी से बहुत अलग तो नहीं हैं।

इससे आपको अपनी मनपसंद फंड स्कीम चुनने में मदद मिलेगी, साथ ही आपको अलग-अलग फंड से अब तक मिले औसत रिटर्न का अंदाजा भी लग जाएगा। आप अलग-अलग रेटिंग एजेंसियों की इन फंड्स को दी गई रेटिंग भी देख सकते हैं हालांकि इन रेटिंग में एकरूपता नहीं होती, फिर भी आपको एक आइडिया जरूर मिल जाता है कि किन पैरामीटर्स पर किसी फंड को आंका गया है।

रिस्क

लोगों के बीच यह धारणा है कि म्यूचुअल फंड एक ऐसा निवेश होता है, जिसमें जितना रिस्क लेंगे, उतना ज्यादा रिटर्न (धन) आपको मिलेगा। यह धारणा बिलकुल गलत है। कोई भी म्यूचुअल फंड इस स्ट्रैटजी पर काम नहीं करता है। बेहतर होगा यदि आप कम रिस्क वाले ही म्यूचुअल फंड लें, ताकि धीरे-धीरे अच्छीच मात्रा में रिटर्न मिल सके।

इसका आंकलन करने के लिए समान श्रेणी के दो म्यू चुअल फंड की तुलना करें वो भी उस समय में जब बाजार में तेजी से उछाल आया हो या गिरावट आयी हो। उससे आप आसानी से दोनों में बेहतर चुन सकते हैं। दोनों के रिटर्न की तुलना करके आप म्यूछचुअल फंड को चुन सकते हैं।

 

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