भिखारी की पत्नी ने आंखों के सामने तोड़ दिया था दम, अब बाइक एंबुलेंस बनाकर कर रहा है गरीब की मदद

भिखारी की पत्नी ने आंखों के सामने तोड़ दिया था दम, अब बाइक एंबुलेंस बनाकर कर रहा है गरीब की मदद

By: Sanjeev kumar
January 14, 03:01
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LIVE BIHAR DESK: हैदराबाद के एक शख्स ने बाइक एंबुलेंस बनाई है। बाइक से जुड़कर चलने वाली इस एंबुलेंस बनाने की कहानी बहुत भावुक है। इस एंबुलेंस को बनाने में लगभग एक साल का वक्त लगा है। हैदराबाद के नामपल्ली में गिराज चलाने वाले 43 साल के 'मोहम्मद शहजोर खान' ने एक ऐसी एंबुलेंस बनाई है, जो बाइक से जुड़कर काम करती है। रामुलू और उसकी पत्नी कविता दोनों लेप्रोसी के मरीज थे और भीख मांगकर अपना गुजारा करते थे। इलाज न होने पर कविता ने रेलवे स्टेशन पर दम तोड़ दिया था। रामुलू को पत्नी का अंतिम संस्कार करने के लिए उसे गाड़ी की जरूरत थी, लेकिन पैसे न होने की वजह से किसी ने उसकी मदद नहीं की। 

इस घटना को सुनकर शहजोर दुखी हुए और उन्होंने कुछ करने के लिए ठान लिया। सिर्फ 335 दिनों में उन्होंने एक ऐसी एंबुलेंस बना डाली जो बाइक से जुड़कर काम कर सकती है। इस एंबुलेंस की लागत सिर्फ 1.10 लाख आई। हालांकि केबिन का खर्च ही लगभग 65 हजार आया। 

हीरो हॉन्डा सीडी डीलक्स बाइक से जुड़कर चलने वाली इस एंबुलेंस में वो सारी सुविधाएं हैं जो किसी आम एंबुलेंस में होती हैं। शहजोर ने कहा, 'रामुलू की पत्नी की खबर ने मुझे अंदर तक हिला दिया था और मैंने गरीबों की मदद करने के लिए इस एंबुलेंस को बनाया।

शहजोर के पिता कस्टमाइज्ड बाइक बनाने में माहिर हैं। अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहे शहजोर ने दस लोगों के साथ मिलकर हीरो हॉन्डा बाइक से इस एंबुलेंस को जोड़ दिया है। इसमें एक वक्त पर एक मरीज को ले जाया जा सकता है। इसकी खास बात यह है कि भारी ट्रैफिक जाम में भी ये आसानी से निकल सकती है, जबकि नॉर्मल एंबुलेंस का निकलना काफी मुश्किल होता है।

फिलहाल मोहम्मद शहजोर खान इस बाइक को सिर्फ ग्रामीण इलाकों में मेडिकल सेंटर के लिए उपलब्ध करवाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें ये भला काम करने की प्रेरणा उनके पिता से मिली जो 1975 से विकलांगों के लिए मोडिफाइड बाइक बनाने का काम कर रहे हैं।

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