दो दोस्तों ने बनाई थी महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी, बंटवारे ने कर दिया अलग, जानिए पूरी कहानी

दो दोस्तों ने बनाई थी महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी, बंटवारे ने कर दिया अलग, जानिए पूरी कहानी

By: Sanjeev kumar
January 14, 04:01
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LIVE BIHAR DESK:आज जिस महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी का डंका पूरे हिंदुस्तान में बज रहा है। उसकी नींव एक पाकिस्तानी और एक हिंदुस्तानी दोस्त ने रखी थी। लेकिन बंटवारे ने नाम सिर्फ हिंदुस्तान के दो टुकड़े कर दिये, बल्कि दो दोस्तों को भी एक-दूसरे से अलग कर दिया। साल 1945 में दो भाइयों केसी महिंद्रा और जेसी महिंद्रा ने एक कंपनी बनाने का फैसला किया। जिसके लिए दोनों भाइयों ने अपने करीबी दोस्त गुलाम मुहम्मद से मुलाकात की। तीनों का सप ना दुनिया की बेहतरीन स्टील कंपनी बनाने का था। उन्होंने महिंद्र एंड मुहम्मद के रूप में कंपनी की नींव रखी। लेकिन इस बीच इनकी दोस्ती टूट गई।

हिंदुस्तान का बंटवारा हो गया। गुलाम मुहम्मद को पाकिस्तान जाना पड़ा। गुलाम मुहम्मद पाकिस्तानी सरकार में पहले वित्त मंत्री बने। दोस्त के चले जाने के बाद कंपनी चलाने की जिम्मेदारी महिंद्रा बंधुओं पर आ गई। साल 1948 में उन्होंने कंपनी का नाम बदलकर महिंद्रा एंड महिंद्रा कर दिया।

महिंद्रा बंधुओं ने मुहम्मद के जाने के बाद कंपनी की रणनीति में भी बदलाव किया। तीनों का सपना दुनिया की सबसे बड़ी स्टील कंपनी बनाने का था। लेकिन दोस्त के अलग होने के बाद महिंद्रा बंधुओं ने ऑटो इंडस्ट्री में कदम रखने का फैसला किया। इसके पीछे वजह थी कि केसी महिंद्रा ने अमेरिकी कंपनी में काम करने के दौरान जीप देखी थी और वो भारत में ऐसी ही जीप बनाने चाहते थे। इसलिए इस कंपनी ने ऑटो इंडस्ट्री में कदम रखा।

महिंद्रा बंधुओं ने कड़ी मेहनत की और इस कंपनी को भारत की बड़ी कंपनियों की लिस्ट में ला दिया। साल 1991 महिंद्रा ग्रुप के लिए काफी अहम साल रहा। इस साल भारत ने अर्थव्यवस्था को उदार बनाना शुरू कर दिया। जिसका फायदा इस कंपनी को भी मिला। इसके बाद ये कंपनी ने बुलंदी की नई ऊंचाई पर पहुंचने लगी।

आज महिंद्रा समूह भारत के 10 औद्योगिक घरानों में से एक है। ये दुनिया के तीन सबसे बेहतर ट्रैक्टर निर्माता कंपनियों में से एक है। वक्त के साथ कंपनी ने अपनी रणनीति भी बदली और कई व्यवसाय में हाथ अजमाया और उनको सफलता भी मिली। इस समूह में आज 75 हजार कर्मचारी काम करते हैं।

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