जानवरों को बचाने की जिद में इनकम टैक्स अफसर ने छोड़ी नौकरी

जानवरों को बचाने की जिद में इनकम टैक्स अफसर ने छोड़ी नौकरी

By: Basant kumar
January 14, 04:01
0
......

LIVE BIHAR DESK : अपने लिए तो सभी जीते हैं लेकिन दूसरों के लिए जीने का माद्दा बहुत कम लोगों में होता है। ऐसे ही बिरले लोगों में हैं बिहार की राजधानी पटना शहर के मूल निवासी और अभी उदयपुर मेें रह रहे अभिषेक सिन्हा। अभिषेक कुछ महीनों पहले तक भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी थे। काफी कम उम्र में इज्जत-शोहरत पाई और एक सफल जिंदगी जी रहे थे, लेकिन आज नौकरी छोड़कर पशुओं की हत्या रोकने के लिए अपनी महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रहे हैं। इन्होंने पशुओं के मांस का शाकाहारी विकल्प बाजार में उपलब्ध कराया है। ताकि लोग पशुओं का मांस खाना छोड़कर अनाज और मसालों से बने इस कृत्रिम मांस को खाना शुरू कर दें। 

अभिषेक कहते हैं कि बचपन से पशु-पक्षियों के लिए मन में काफी प्यार था। बचपन में ही घर की छत पर जाकर चिड़ियों को दाना खिलाता था। आसपास के जानवरों को रोटी खिलाना चाहता था तो मम्मी डांटती कि इतनी मेहनत से रोटी बनाती हूं और तुम ले जाकर जानवरों को खिला देते हो। इसके बाद सातवीं कक्षा में ही खुद रोटी बनाना सीखा और जानवरों को रोटी बनाकर खिलाने लगा। स्कूली शिक्षा के बाद पुणे यूनिवर्सिटी से केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। पढ़ाई के बाद प्राइवेट और सरकारी क्षेत्र में अधिकारी स्तर की 3-4 नौकरियां की और छोड़ी। इसके बाद यूपीएससी की परीक्षा पास कर आईआरएस अधिकारी बना। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में उच्च अधिकारी रहा। 


उदयपुर में अपनी पोस्टिंग के दौरान एक अमेरिकी परिवार से संपर्क हुआ, जो ग्रामीण इलाके में रहकर बीमार और लाचार जानवरों की सेवा करते हैं। नौकरी से बचे समय में उनके पास चला जाता था और जानवरों के लिए जो भी कर सकता था, करता था। उनकी स्थिति देखकर काफी दुख होता था कि आखिर इंसान अपने स्वाद के लिए इन बेजुबान जानवरों की हत्या क्यों करता है। एहसास हुआ कि जानवरों की हत्या तब तक नहीं रुक सकती जबतक कि लोगों के पास मांस या मीट का कोई बेहतर विकल्प नहीं होगा। कृत्रिम मांस लाना चाहा ताकि लोग मांस खाना छोड़ सके। बाजार में सोया चाप जैसे विकल्प मौजूद थे लेकिन यह मैदा का बना होता है और मांसाहारी व्यक्ति को यह मांस की तरह नहीं लगता। ऐसे में काफी रिसर्च करने के बाद अपने दोस्त दीपक परिहार, स्टेफनी डाउंस और पत्नी तरन्नुम के साथ मिलकर करीब 22 तरह के अनाज और मसालों को मिलाकर कृत्रिम मीट या शाकाहारी मीट को उतारा। 


अभिषेक के काम को अमेरिका में भी प्रशंसा मिली। अगस्त में न्यूयार्क में हुए फ्यूचर ऑफ फूड कॉन्फ्रेंस में भारत से प्रतिनिधित्व करने वाली अकेली कंपनी इनकी थी। यूनिवर्सिटी ऑफ केर्लिफोनिया बर्कले में प्लांट बेस्ड मीट पर नए आइडिया पर हुई प्रतियोगिता में यह और इनके साथी जज के तौर पर आमंत्रित थे। अभिषेक अपने इस अनोखे तरीके से जानवरों की हत्या और उनपर होने वाले अत्याचार को रोकने में लगे हैं। 

हर ताज़ा अपडेट पाने के लिए के फ़ेसबुक पेज को लाइक करें।
comments