ई-टिकट के प्रिंट आउट के नाम पर यात्रियों की जेब से एयरपोर्ट में वसूले जा रहे एक्स्ट्रा

ई-टिकट के प्रिंट आउट के नाम पर यात्रियों की जेब से एयरपोर्ट में वसूले जा रहे एक्स्ट्रा

By: Sudakar Singh
September 13, 11:09
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Patna : एयर टिकट ऑनलाइन लिया है, तो ई-टिकट का प्रिंट आउट लेना नहीं भूलें, क्योंकि बोर्डिंग काउंटर पर इनका प्रिंट आउट लेने पर विमान कंपनियां 50 रुपये वसूल रही हैं। यह सामान्य प्रिंट आउट चार्ज दो रुपये से 25 गुना अधिक है। आये दिन एयरपोर्ट पर ऐसी घटनाएं होती रहती हैं, जब मोबाइल पर भेजे गये कंफर्मेशन मैसेज को ही पर्याप्त मान यात्री एयरपोर्ट पहुंच जाते हैं। बोर्डिंग काउंटर पर उनसे टिकट मांगे जाने पर पहले तो मैसेज दिखाने और उसी के सहारे बोर्डिंग देने की गुजारिश होती है।



विमान कंंपनियों के कर्मियों द्वारा ई-टिकट का प्रिंटआउट या कनफर्मेशन मेल के वेरिफिकेशन को अनिवार्य बताने पर कई यात्री तो मोबाइल पर मेल खोल कर दिखा देते हैं। लेकिन नेटवर्क के कमी के कारण जिनका मेल तत्क्षण खुल नहीं पाता, उनको एसएमएस में अंकित पीएनआर नंबर के आधार पर काउंटर पर ही ई-टिकट का प्रिंट आउट लेना पड़ता है। एक प्रिंट आउट के लिए 50 रुपये के चार्ज को अनुचित और अत्यधिक ऊंचा मानने के बावजूद भी अंतिम क्षण होने के कारण यात्रियों के पास कोई विकल्प नहीं होता। लिहाजा दबे जुबान वे इसे चुकाने काे मजबूर हैं।



सुरक्षा की दृष्टि से जरूरी है प्रिंट आउट : 

एसएमएस में केवल पीएनआर संख्या होती है। यात्री का नाम, उम्र , पता जैसी व्यक्तिगत जानकारी नहीं होती। इसकारण एसएमएस के सहारे यात्री का सुरक्षा संबंधी वेरीफिकेशन नहीं हो सकता। ऐसे में सुरक्षा संबंधी वजहों से सीआइएसएफ बिना ईटिकट देखें बोर्डिंग पास नहीं देती और प्रिंट आउट या ओपेन मेल जरूरी हो जाता है ।



यात्रियों की जेब से एयरपोर्ट की ओर से वसूले जा रहे ऊंचे चार्ज की भरपाई:

यात्रियों को हर दिन परेशान होते देख प्रभात खबर ने पटना एयरपोर्ट से सेवा दे रही विभिन्न विमान कंपनियों के स्थानीय अधिकारियों के सामने इस मुद्दे को उठाया। ज्यादातर ने इसके लिए एयरपोर्ट पर जगह, बिजली और रोशनी आवंटित करने के एवज में लिये जा रहे ऊंचे चार्ज को जिम्मेदार बताया।

जब उनसे पूछा गया कि पांच-दस गुना चार्ज (10-20 रुपये) वसूल कर क्या इसकी भरपाई संभव नहीं है जो 25 गुना अधिक कीमत वसूला जा रहा है तो कोई जवाब नहीं मिला। कुछ ने इसे कभी-कभार होनेवाली घटना कह कर टालने का प्रयास किया। लेकिन इस का जवाब वे भी नहीं दे सके कि ऐसा कभी कभार होता है, तो इसे यात्रियों के हित में नि:शुल्क क्यों नहीं कर दिया जाता है।
 

 

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