UAE में चारों तरफ फैली है रेत, लेकिन दूसरे देशों से रेत खरीदना बन गया यहां की मजबूरी

UAE में चारों तरफ फैली है रेत, लेकिन दूसरे देशों से रेत खरीदना बन गया यहां की मजबूरी

By: Rohit saklani
September 13, 09:09
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New Delhi: क्या आपने कभी सोचा है कि इस धरती से रेत जल्द ही खत्म हो जाएगी, लेकिन ये सच है कि भविष्य में आपको धरती पर रेत नहीं दिखेगी, क्योंकि दूसरे प्राकृतिक संसाधनों की तरह अब रेत का भी तेजी से इस्तेमाल हो रहा है। हाल ये है कि जिस देश के अधिकतर हिस्से में रेत फैली हुई है, उसे दूसरे देशों ने हर साल अरबों की रेत खरीदकर मंगानी पड़ रही है।

दरअसल, संयुक्त अरब अमीरात को भी अब दूसरे देशों से रेत आयात करनी पड़ रही है। खासकर दुबई में निर्माण कार्य के लिए ऑस्ट्रेलिया से रेत मंगानी पड़ रही है। इसका सबसे बड़ा कारण अवैध खनन है। BBC के मुताबिक संयुक्त अरब अमीरात ने 2014 में 456 मिलियन डॉलर मूल्य की रेत, पत्थर और बजरी का आयात किया।

लेकिन अब तक आपके दिमाग में ये सवाल जरूर कौंध रहा होगा कि जिस देश में चारों ओर रेत फैली है, उसका इस्तेमाल क्यों नहीं किया जाता। दरअसल, निर्माण के लिए ज्यादातर रेत नदी के किनारे और महासागरों से आती है, रेगिस्तान की रेत काफी चिकनी होती है इसलिए इसका इस्तेमाल नहीं हो सकता।

कॉन्क्रीट, सड़कें, शीशा और इलेक्ट्रॉनिक्स सामान बनाने के लिए रेत का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए पानी के बाद रेत दूसरी सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली प्राकृतिक वस्तु है। 2014 UNIP की रिपोर्ट में कहा गया है कि हर साल दुनिया भर में खनिज पदार्थों के वजन के कारण रेत का उत्पादन 85% तक होता है। हर साल 40 अरब टन से अधिक रेत और बजरी का उपयोग किया जाता है। यही नहीं रेत खनन का बाजार 70 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक रेत खनन के कारण आने वाले समय में प्राकृतिक को बहुत नुकसान हो सकता है। आपको बता दें चीन की सबसे बड़ी झील, प्योंगयांग सिर्फ रेत खनन के कारण सूखने वाली है। केन्या में नदी किनारे हो रहे रेत खनन की वजह से कई समुदाय अब बिना पानी के जी रहे हैं। 

यही हाल भारत में भी है, जहां केरल की पंपा, मणिमाला और अचनकोविल जैसी नदियों के किनारे हो रहे खनन की वजह से जलस्तर कम हो रहा है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में, छोटी गंडक, गुरुरा, राती और घाघरा जैसे नदियों में रेत खनन के कारण मिट्टी दबने लगी है। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि समुद्र तटों पर रेत खनन के कारण मछली, मगरमच्छ जैसे पानी के जानवरों को भी परेशानियां हो रही है। हालांकि रेत खनन को रोकने के लिए नियमों का पालन करने की जरुरत है।

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