अली अनवर अंसारी मात्र 20 साल में ‘पोखर’ से ‘दरिया’ बने हैं

अली अनवर अंसारी मात्र 20 साल में ‘पोखर’ से ‘दरिया’ बने हैं

By: kanhaiya bhelari
December 06, 05:12
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Live Bihar Desk : तय तारीख से लगभग 6 महीना पहले ही सांसदी छिन जाने के बाद जनाब अली अनवर अंसारी ने नूरानी भंगिमा के साथ शायराना अंदाज में फरमाया है ‘मैं दरिया हूं, जिस तरफ चल पड़ूं रास्ता बन जाता है’। अपन तो ढ़ोड़ीं से खुश है कि पत्रकार यार शायर बन गया। ड्राई बिहार में न सही दिल्ली में तो जमेगी ही। वैसे सांसद जी टी टोटलर हैं।


बहरहाल, बिलकुल ठीक फरमाया है हंसमुख स्वभाव के डुमरांव निवासी रेडिकल बैकग्राउन्ड के अंसारी ने। तीन दशक पहले चार बच्चों के पिता अली अनवर अंसारी छोटी पोखर थे। लालू प्रसाद यादव के ब्लेसिंग से नदी बने और सीएम नीतीश कुमार ने 2006 में ऐसा जड़ी दिया व सुंघाया कि फटाक से दरिया बन गये।
अब हम ठेठ बिहारी में उनका बखान कर रहा हूं। नब्बे के दशक में पटना से प्रकाशित कम्यूनिष्ट अखबार में साइकिली पत्रकार थे। गटर पर बने एक रूम में सपरिवार 6 प्राणी वास करते थे। अपना संडास भी नहीं था। लोटा का बहुत इस्तमाल करना पड़ता था।

20वीं सदी में दयालु दिल के कलमजीवी मित्रों के अथक परिश्रम से लालू ने आलू का चोखा खिलाया और बैकवर्ड कमीशन का मेंम्बर नामीनेट किया तो एपार्टमेंट मे किराये पर दू रूमा फलैट लेकर रहने लगे। 21वीं शदी में राज्यसभा में ढ़ुकते ही परवरदिगार ने छप्पर फाड़ कर दिया। खटाक से माननीय ने पटना के हारून नगर में करोड़ो का मकान और नोयडा लाखों में जमीन खरीद ली। कहते हैं तब अंसारी ने अपनी पत्नी से कहा था ‘नीतीश मेरे लिये कृष्ण हैं जिन्होनें सुदामा का उद्धार कर दिया’।


जबतक राज्यसभा के सदस्य रहे नैतिकता को खूंटी पर टांग कर अपने दो पुत्रों को अपना आफिसियल पीए बनाये रहे। जब बॅास नीतीश कुमार ने ऐसा नहीं करने की सलाह दी तो भीतरे-भीतर बमक गये। कहते हैं कि अपने खास टीटीम से बोले, ‘बिना मतलब के फोकट में सलाह देने वाले सीएम हैं नीतीश कुमार’। इतना ही नहीं जब बहुत सारे सांसदो का दरेपर्दा रेट 20 प्रतिशत था तो जनाब का खुल्ल्मखुला 30 परसेन्ट चल रहा था। बकौल एक पूर्व लोकसभा सदस्य फ्राम बक्सर, ‘डुमरांव में मस्जिद मरम्मती के लिये अपने कोटे से फंड दिया था।

चेक करने गया तो देखा कि घटिया काम हो रहा है। ठेकेदार को बुलाकर गाल पर एक झाप मारा। पैर पकड़कर रोते हुए कहा सर आप न माल नहीं टाने हैं दूसरे वाले एमपी साहब का फंड भी मस्जिद में लगा है अउर वो पहिले ही तसील लिये हैं। अगर ठीक से काम करायेंगे तो मेरा सब कुछ बिक जाऐगा’।
बरखुदार आप बेसक दरिया हैं। लेकिन यकीनन बिना सतह वाले दरिया। आप तो ऐसे ना थे्। पासमादा महाज के दिल पर कभी राज करने वाला शक्स आज फारचुनर की सवारी करने लगा, बाज की तरह बेहतरीन शिकार के लिये आसमान में गिरह मारने लगा। साइकिल, बैलगाड़ी और पदैल चलने वालों और बीड़ी की कश मारने वालों की देह से आपको बदबू आने लगी। जिसकी हेल्प से आप दू टर्म संसद की छाली चाटने में सफल रहे उसको आपने अछूत घोषित कर दिया।


लकिन आप तो जानते ही होगें कॉमरेड कि दरिया के जल को कोई पीता नहीं है और न ही सिंचाई होती है। दरिया जान, माल, गाड़ी, बाड़ी सब कुछ उखाड़कर और उजाड़कर रास्ता बनाता है। और अपने जिस्म में थोक के भाव में नमक रखता है।

--- कन्हैया भेलारी

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