जहानाबाद विधानसभा सीट के लिए एक अनार, सौ बीमार जैसी स्थिति, सबसे ज्यादा प्रत्याशी RJD के

जहानाबाद विधानसभा सीट के लिए एक अनार, सौ बीमार जैसी स्थिति, सबसे ज्यादा प्रत्याशी RJD के

By: Sudakar Singh
November 13, 01:11
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Jahanabad : जहानाबाद विधानसभा सीट  पर अभी से उप-चुनाव को लेकर भावी प्रत्याशियों के बीच हलचल तेज हो गयी है। यहां से राजद विधायक मुन्द्रिका सिंह यादव के बीते माह निधन हो जाने से यह सीट खाली हो गया है। हालांकि अभी इस सीट पर चुनाव आयोग द्वारा उप-चुनाव की अधिसूचना जारी नहीं हुई है। फिर भी इतने संभावित प्रत्याशियों की होड़ है कि अभी से ही यहां ‘एक अनार, सौ बीमार’ वाली स्थिति है। सबसे ज्यादा होड़ राजद में है। भूमिहार और यादव बहुल्य वाले जहानाबाद सीट राजद की सीटींग सीट है। बीते चुनाव में राजद-जदयू और कांग्रेस महागठबंधन में यह सीट राजद के खाते में गया, जहां से मुन्द्रिका सिंह यादव विधायक चुने गए। 2010 के चुनाव में यह सीट एनडीए (जदयू-भाजपा) के कोटे में था, तब जदयू के अभिराम शर्मा यहां से विधायक चुने गए थे। 

मुन्द्रिका यादव के निधन के बाद से यहां राजद खेमे में इस बात को लकर सरगर्मी शुरू हो गई कि स्व. मुन्द्रिका यादव का राजनीतिक उत्तराधिकारी कौन बनता है और राजद किसे टिकट देता है। यहां तक कि दावेदार अभी से ही अपने-अपने राजनीतिक आकाओं के यहां दौड़ लगा अपनी दावेदारी पुख्ता करने की कोशिश में जुट गए हैं। इस सीट पर राजद के दावेदारों में पूर्व विधायक मुन्नी लाल यादव, पूर्व विधायक सच्च्दिानंद यादव, सहानुभूति के आधार पर स्व. मुन्द्रिका यादव के दो सुपुत्र क्रमश: उदय प्रताप यादव एवं सुजय यादव, जहानाबाद जिला परिषद की अध्यक्ष के श्वसुर विजय मंडल, राजद जिलाध्यक्ष मुजफफर हुसैन राही, युवा राजद के डा. शशिरंजन उर्फ पप्पू यादव, धर्मपाल यादव, परमहंस राय, बैकुण्ठ यादव, नागमणि मुखिया, छत्रधारी यादव, ज्ञान्ती देवी, सरोजनी देवी,, नागेन्द्र मेहता, मृत्युजय यादव, अम्बिका यादव, पूर्व प्रमुख सूर्यदेव, सुरेन्द्र यादव रकसिया, स्वतंत्रता सेनानी सतीश चंद्र यादव, रामप्रवेश मुखिया एवं मनोज यादव, देवकुली सहित एक दर्जन और दावेदार लाइन में है। 

 

इतना तय है इन दावेदारों में से एक नाम राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद तभी तय करेंगे जब पूर्व सांसद व बेलागंज के कद्दावर राजद विधायक सुरेन्द्र यादव अपनी सहमति देंगे। इधर सीट को लकर एनडीए में भी घमासान हो सकता है। पिछले चुनाव में एनडीए ने यह सीट रालोसपा को दी थी तब रालोसपा के उपेन्द्र कुशवाहा और अरुण कुमार गुट एक था। अब परिस्थितियां भिन्न हैं। पिछले चुनाव में अरुण कुमार ने अपने चहेते प्रवीण कुमार को टिकट दिलायी थी जिन्हें राजद प्रत्याशी से मुंह की खानी पड़ी। चुनाव आयोग ने अभी अरुण कुमार के नेतृत्व वाली पार्टी को मान्यता नहीं दी है। यूं तो अभी अरुण कुमार एनडीए के साथ हैं, पर अगर जहानाबाद सीट पुन: रालोसपा के खाते में जाता है तो एक बार प्रत्याशी को लेकर दोनों नेताओं में जीत संभव है। 
अगर उपेन्द्र कुशवाहा वाली रालोसपा को यह सीट मिलता है तो रालोसपा जहानाबाद के अपने जिलाध्यक्ष गोपाल शर्मा को टिकट दे सकता है। गोपाल शर्मा पूर्व में लाजपा के जिलाध्यक्ष थे और ये दो बार लोजपा टिकट पर चुनाव लड चुके हैं और एक बार दूसरे जबकि दूसरी बार तीसरे स्थान पर रहे। अगर यह सीट जदयू के खाते में गया तो जदयू के सबसे प्रबल दावेदार यहां से 2010 में चुनाव जीत चुके अभिराम शर्मा ही होंगे।


अभिराम शर्मा को जदयू सांसद और धनकूबेर महेद्र प्रसाद का संरक्षण मिलता रहा है, इसलिए सांसद भी अभिराम शर्मा के लिए प्रयास करेंगे ही। हालांकि अभिराम शर्मा का 2010-15 के पांच वर्षों के कार्यकाल से यहां की जनता बेहद नाखुश थी। अगर महेन्द्र प्रसाद का ना चल कर सांसद आरसीपी सिंह की चली तो व जदयू प्रत्याशी के रुप में इसी क्षेत्र के निवासी जदयू के उभारते अविवादित नेता प्रभात कुमार के नाम का प्रस्ताव मजबूती से रख सकते हैं।

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