किले पर उगी झाड़ियां और खराब घड़ी भी सजावट का ही हिस्सा है?

  • 04 Dec, 2016
  • Shitanshu shekar singh
  • Abhijna verma

MUNGER : जिला प्रशासन के अधिकारियों का दावा है कि मुंगेर स्थापना दिवस पर शहर को दुल्हन की तरह सजाया गया है। परंतु किले पर उगी झाड़ियां और किले की खराब घड़ी उनके दावों की पोल खोल रही है।

2 से 5 December तक मुंगेर जिला का स्थापना दिवस मनाया जा रहा है। आयोजक जिला प्रशासन के अधिकारियों का दावा है कि शहर को दुल्हन की तरह सजाया गया है। तो क्या किले पर उगी झाड़-पतवार व किले की खराब घड़ी भी इस सजावट का ही हिस्सा है या फिर लाखों के बजट से मनाए जाने वाले इस आयोजन में इसके लिए बजटीय प्रावाधान नहीं है।
यह सवाल हर आम मुंगेरी के जेहन में तब उठने लगता है जब वे मुख्य आयोजन स्थल पोलो मैदान की ओर जाते हुए मुख्य किला से गुजरते है। आयोजक की माने तो पूरे किला परिसर को दुल्हन की तरह सजाया गया है। लेकिन इसका दूसरा पहलू यह भी है कि मुख्य किला को यू ही उपेक्षित छोड़ दिया गया है।
इतना ही नहीं जब लोग रात में मुख्य कार्यक्रम स्थल पोलो मैदान में रात के आयोजित कार्यक्रम को देखने पोलो मैदान जाते हैं तो उन्हे किला के पास से अंधेरे में ही गुजरना पड़ता है। तो क्या किला के पास बिजली की व्यवस्था करना इस आयोजन का हिस्सा नही है?
सरकारी कार्यालय या पार्को में रंग रोगन कराना और बल्ब लगाना इस आयोजन का हिस्सा है। क्या उन पार्को की साफ-सफाई इस आयोजन का हिस्सा नहीं है। इस आयोजन के ऐसे कई पहलू देखने को मिलेगें जब आपके मन में इस आयोजन के उदेश्य व औचित्य पर प्रश्न खडे हो जाएंगे।
आखिर जिला स्थापना दिवस मनाने के पीछे सरकार की क्या मंशा है। यह बात हर मुंगेरी के जेहन में हर साल उठता है कि क्या मुंबई के आउटडेटेड कलाकरों पर लाखों खर्च कर देना ही इस आयोजन का उदेश्य या औचित्य है।
मुंगेर की धरोहर या यहां की प्रतिभा की सहभागिता के नाम पर वैसे चेहरे ही इस आयोजन में नजर आते हैं जो आयोजक जिला प्रशासन के आला आधकारियों के दरबार की शोभा बढ़ाने में महारथ होते हैं।
फिर इस आयोजन के उदेश्य पर आम मुंगेरी के मन में यह सवाल स्वाभाविक ही है कि हर साल मुंगेर जिला के की स्थापना दिवस को लेकर सरकारी खजाने से लाखो खर्च के बाद इस आयोजन का औचित्य क्या है?
 

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