52 शक्ति पीठों में से एक है बेगूसराय का मां जयमंगला गढ़

  • 08 Dec, 2016
  • Preety Kumari

BEGUSARAI: मां जयमंगला गढ़ पुरातात्विक महत्व का प्राचीन गढ़ है यह। जिसके मुख्य टीले का पूर्वी भाग 1350 फीट एवं पश्चिमी भाग 1250 फीट ऊंचा है। निर्माण में पक्की ईटों का उपयोग 120 एकड़ में फैले गढ़ पर जंगल।

 यहां खुदाई में पंच मार्क सिक्के, शिव पार्वती के विभिन्न मुद्राओं की प्रतिमाएं, नवग्रह, बराह, सूर्य मूर्तियां आदि जो मौर्यकालीन व गुप्त कालीन हैं प्राप्त हुई है। यही पर 52 शक्ति पीठों में से एक मां जयमंगला का मंदिर स्थित है। वर्तमान में यहां पहुंचने का सड़क जर्जर है। गढ़ पर बराबर अपराधियों का तांडव चलता रहता है। सार्वजनिक भवन व पेयजल का घोर अभाव है।
पाल कालीन ऐतिहासिक शक्ति पीठ मां जयमंगला गढ़ या गौतम बुद्ध के प्रवास के गवाह रहे प्रसिद्ध हरसाइन स्तूप या साइबेरियन पक्षियों की चहचहाहट से गूंजते रहनेवाले प्रसिद्ध काबर पक्षी विहार 
काबर पक्षी विहार
सुनहरे अतीत का स्याह वर्तमान है। जैव विविधता का अकूत खजाना बिल्कुल खाली है। गंगा नदी के उत्तरी मैदानी भाग में 57 हजार वर्ग हेक्टेयर में चिह्नित वेट लैंड में यह प्रमुख है। दर्ज दस्तावेजों के आंकड़ों के अनुसार 17 हजार 780 एकड़ में फैला यह काबर परिक्षेत्र। यहां सघन वन, जल क्षेत्र को देख 20 जनवरी 1989 को इसको पक्षी विहार घोषित किया गया।
दो जनवरी 2000 को केंद्रीय वन मंत्रालय ने इसे देश के दस 'रामसेट' में शामिल किया। वर्ष 2007 में इसे 'रामसेट' साइट से बाहर कर दिया गया। अब यह देश के नोटिफाइड 94 वेलटैंड में से एक है। वर्तमान में काबर में धनकर, कोचालय, महालय, गुआवाड़ी आदि जगहों पर पानी बचा है। वहीं सौ एकड़ के लगभग में वन बचा है। पक्षी व जंगलों तो लुप्त हो गए हैं।

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