जियो भारत के शेरों

  • 20 Dec, 2016
  • Ashok Kumar Sharma

patna:खेल के मैदान में इंग्लैंड को पानी पिला पिला कर मारा । जिसने क्रिकेट को जन्म दिया उसका भारत की सरजमीं पर रायता फैल गया। ऐसी जीत ने ऐतिहासिक जख्मों पर पर मरहम लगा दिया।

चेन्नई में खेले गए पांचवें और आखिरी टेस्ट मैच में भारतीय टीम ने इंग्लैंड को एक पारी और 75 रन से धूल चटा दी।
देश के 84 साल के टेस्ट इतिहास में ये सबसे खुशनुमा पल है। भारत ने पहली बार विलायती बाबुओं का ऐसा भुर्ता निकाला है। 4-0 से श्रृंखला जीतना अदभुत हैं। ये सबसे बड़ी जीत है। इस सीरीज में कई बाते ऐसी हुईं जो पहले कभी नहीं हुईं। पहली बार इंग्लैंड को चार टेस्ट मैचों में हराया। भारत ने अपना सर्वोच्च टेस्ट स्कोर बनाया 759 पर सात। करुण नायर ने अपने तीसरे टेस्ट में ही तिहरे शतक के साथ शतकीय यात्रा की शुरुआत की। रवीन्द्र जडेजा ने जीवन में पहली बार सात विकेट लिये। के एल राहुल ने अपना सर्वोच्च स्कोर बनाया 199 रनों का । पहली बार किसी सीरीज में भारत के छह बल्लेबाजों ने शतक लगाये ।
भारत में इस साल 9 टेस्ट मैच जीते हैं। 18 टेस्ट मैच में एक भी नहीं गंवाया है। ऐसा पहले की नहीं हुआ। इंग्लैंड की टीम दो बार 400 रन बना कर भी हार गयी । ऐसी दुर्गति पहले कभी नहीं हुई।
पहली बार भारतीय टीम किसी एक खिलाड़ी पर निर्भर नहीं रही। एक नाकाम हुआ तो दूसरे ने बागडोर थाम ली। भारत के बल्लेबाजों और गेंदोबाजों ने मिल कर नतीजे निकाले।

इंग्लैंड के खिलाफ भारत तब से क्रिकेट खेल रहा है जब वह गुलाम था। तब अकड़ वाले अंग्रेज भारतीयों को तीन कौड़ी का खिलाड़ी मानते थे। गुलामी और गरीबी से जूझ रहे भारत में उस वक्त क्रिकेट मजबूत था भी नहीं। राजा महाराजा जबरन खिलाड़ी बन जाते थे और टीम का बेड़ा हो जाता था गर्क। अंग्रेजों के खिलाफ भारत को पहली जीत मिली थी 1952 में मद्रास के चेपक के मैदान पर। अब मद्रास चेन्नई हो गया है। लेकिन यहां की जमीन फिर एक बार इतिहास का गवाह बनी। भारत ने यहां सीरीज का पांचवां और आखिरी टेस्ट मैच अपने नाम कर जीत का चौका लगा दिया। 2011 का हिसाब सूद समेत चुकता हो गया।
 

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