आस्था, उमंग और उत्साह के सात दिन.... पंजाब के दिल में बसा बिहार

  • 05 Jan, 2017
  • Ashok Kumar Sharma

PATNA : पटना का गांधी मैदान पिछले सात दिनों से एक तीर्थस्थल में तब्दील था। यहां गुरु गोविंद सिंहजी के 350 वे प्रकाशोत्सव का मुख्य समारोह आयोजित किया गया था। 5 जनवरी को प्रधानमंत्री की उपस्थिति से ये समारोह और खास हो गया ।

हालांकि गांधी मैदान की टेंट सिटी 10 जनवरी तक आबाद रहेगी लेकिन गुरु साहेब के जन्म दिन का मूल समारोह गुरुवार की शाम को अपने मुकाम पर पहुंच गया। पटना में किसी धार्मिक आयोजन के दौरान ऐसा उत्साह पहले कभी नहीं देखा गया। जोश और उमंग के साथ भीड़ का अनुशासन ऐतिहासिक रहा। बिहार सरकार और प्रसासन ने जिस तरह से मेहनत कर के इस आयोजन को सफल बनाया वह भी काबिलेतारीफ है।
टेंट सिंटी
तख्त हरिमंदिर साहिब गुरुद्वारा है तो पटना सिटी में लेकिन प्रकाशोत्सव का मुख्य समारोह आयोजित किया गया था पटना के गांधी मैदान में। यहां थर्मोकोल से एक अस्थायी गुरुद्वारा बनाया गया है । दरबार हॉल के अलवा एक टेंट सिंटी बसायी गयी जिसमें करीब दस हजार लोगों के रहने की व्यवस्था है। साथ ही पटना सिंटी के कंगन घाट और बाइपास इलाके में भी टेंट सिटी का निर्माण किया गया । यहां आधुनिक तकनीकी के चलंत शौचालय और स्नानागार और अस्पताल की भी सुविधा थी। जिस तरह से टेंट सिंटी के बसाया और सजाया गया वह अदभुत हैं।
विदेश से भी आये श्रद्धालु
गुरु गोविंद सिंह जी के 350 वें प्रकाशोत्सव को भव्य तरीके से मनाने के लिए 22-23 सितम्बर 2016 को पटना में एक अंतर्राष्ट्रीय सिख समागम हुआ था। इसमें पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के अलावा करीब दस देशों से 200 सिख प्रतिनिधि आये थे। तब नीतीश कुमार ने कहा था कि इस समारोह को सफल बनाने के लिए जो भी बन पड़ेगा वे करेंगे। नीतीश कुमार ने जो कहा उससे कहीं बढ़ कर इंतजाम किया। इस धार्मिक आयोजन में फ्रांस, कनाडा, अमेरिका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, सिंगापुर , चीन, मेलेशिया, म्यांमार से हजारों सिख श्रद्धालु शामिल हुए। इसके अलावा देश के कोने कोने से सिख धर्मावालंबी पटना पहुंचे।
गैर सिखों में गजब का आकर्षण
पटना के गांधी मैदान में आबाद टेंट सिंटी का नजारा 30 दिसम्बर को एकदम बदल गया। इस दिन से आम लोगों के अंदर जाने की इजाजत मिली। गांधी मैदान को जिस तरह से सजाया गया था उसको देख कर आम लोगों में बहुत पहले से उत्सुकता थी। जैसे ही प्रवेश की इजाजत मिली लोगों को हुजूम उमड़ने लगा। हर रोज भीड़ की संख्या बढ़ती जा रही थी। गैर सिख भी अस्थायी गुरुद्वारा में जा कर मत्था टेकते, लंगर छकते, घूमते-फिरते और देर शाम अपने घर लौटते। नये साल पर ये उत्साह और बढ़ गया। लोगों के रेला देख कर सिख समुदाय के लोग भी गदगग हो गये। उन्हें ये देख कर बहुत अच्छा लगा कि बिहार के गैरसिख भी उनके धर्म और संस्कृति को जानने समझने में दिलचस्पी ले रहे हैं। बुधवार को दो लाख लोग गांधी मैदान पहुंच गये। आयोजकों ने सुरक्षा और एहतियात के लिए आम लोगों का प्रवेश रोक दिया। बहरहाल बिहार और पंजाब का ये मिलन देश के सांस्कृतिक एकता के लिए ऐतिहासिक है। बिहार ने सामाजिक धार्मिक एकता के संदर्भ में एक नया इतिहास लिखा।
लंगर का भव्य इंतजाम
गांधी मैदान में रोज करीब एक लाख लोग लंगर छक रहे थे। चूकि गुरु गोविंद सिंह जी के 350 वें प्रकाशोत्सव के मौके पर ये समारोह आयोजिक किया गया था इस लिए आयोजकों ने लंगर में 350 व्यंजनों को शामिल करने का फैसला लिया था। लंगर के लिए तीन पंडाल बनाये गये थे। एक बार में 20 हजार लोग प्रसाद ग्रहण करते।
मीडिया का केन्द्र रहा पटना
इतने भव्य आयोजन को मीडिया में खूब चर्चा रही। देश के सभी समाचार पत्रों और न्यूज चैनल के प्रतिनिधि पटना में डेरा डाले रहे। खालास टीवी के जरिये इस समारहो का प्रसारण कई देशों में हो रहा था इस आयोजन के कारण बिहार देश और विदेश में छाया रहा। गुरुवार को मुखंयमंत्री नीतीश कुमार ने भी कहा कि इस आयोजन से बिहार का नाम देश –विदेश तक पहुंच गया है।
पांच जनवरी को मुख्य समारोह
गुरु गोविंद सिंहजी के प्रकासोत्सव का मुख्य समारोह गुरुवार को आयोजित किया गया। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी आये। अरसे बाद नरेन्द्र मोदी और नीतीश कुमार ने क साथ मंच साझा किया। शराबबंदी को लेकर दोनों ने एक दूसरे की तारीफ की। प्रधानमंत्री ने इस भव्य आयोजन के लिए मुख्यमंत्री नीतीश को धन्यवाद दिया। इस मौके पर नीतीश कुमार ने कहा ये अवसर बिहार के लिए ऐतिहासिक है। एक साथ दो धर्मों के लिए विशेष आयोजन हो रहे हैं। पटना में गुरु गोविंद सिंहजी का प्रकाशोत्सव और बोघ गया में बौद्ध धर्म की कालचक्र पूजा हो रही है। इन आयोजनों के बाद बिहार सरकार महात्मा गांधी के चम्पराण सत्याग्रह की सौवीं वर्षगांठ भी भव्य तरीके से मनाएगी।
सम्माजनक विदाई
गुरु गोविंद सिंहजी का जन्मोत्सव पटना सिटी के बाल लीली गुरुद्वारा में देर रात से सुबह तक मनाया जाएगा लेकिन शाम के बाद गांधी मैदान से बहुत लोग भव्य आयोजन की सुखद स्मृतियों को लेकर घर लौटने लगे।आगत अतिथियों का पटना में जिस तरह स्वागत सत्कार हुआ उसको देख कर सिख समुदाय के लोगों ने कहा, ऐसा सम्मान कहीं और नहीं मिला।

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