पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधायें भी मयस्सर नहीं

  • 05 Jan, 2017
  • Chandramani

NALANDA (PARMOD JHA) : पर्यटन बिहार में सबसे तेजी से बढ़ते उद्योग के साथ रोजगार उत्पादक भी है। आर्थिक लिहाज से पर्यटन, नीतीश सरकार के प्राथमिक सूची में है। लेकिन ये नालंदा का र्दुभाग्य है कि पर्यटकों के ठहरने के लिए एक होटल तक नहीं है।

आजादी के 70साल बाद भी पर्यटन विभाग ने पर्यटकों के ठहरने के लिए न होटल का निर्माण किया गया है न हीं पर्यटन बंगला का। इसकी महता को विश्व ने जाना इसी कारण यूनेस्को ने जुलाई में प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावशेष को विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया। विश्व धरोहर में शामिल होते पर्यटकों में बेतहासा वृद्धि हुई है।
इसके बावजूद नालंदा में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। देशी- विदेशी सैलानियों को बुनियादी सुविधाएं भी मयस्कर नहीं हैं। इन सैलानियों के सुविधा के लिए खोला गया पर्यटक सूचना केन्द्र एक दिखाबे की वस्तु बनकर रह गई है।
नालंदा प्राचीन काल से ही ज्ञान और विज्ञान की पवित्र धरती रही है। विश्व में प्राचीन नालंदा विश्व विद्यालय की अपनी विशेष पहचान है। नालंदा धरोहरों का खजाना है। वहां सभी काल खण्ड के धरोहर मौजूद हैं।
लेकिन धरोहरों के पास पीने के पानी और सार्वजनिक शौचालय नहीं है। जिसके कारण सैलानी पानी के लिए पानी-पानी होते रहते हैं। सार्वजनिक शौचालय के नहीं रहने से उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ती है।  

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