डिजी-धन मेले में भिड़ गए केंद्रीय और राज्य मंत्री, एक-दूसरे पर लगाया आरोप

  • 09 Jan, 2017
  • priti singh

PATNA: डॉ.अशोकचौधरी बोले-नोटबंदी देशहित के खिलाफ है। नरेंद्र मोदी सरकार ने आर्थिक गुलामी की नौबत ला दी। केंद्र सरकार, डिजिटल इंडिया की बात करती है, लेकिन 45% लोगों के पास बैंक खाता ही नहीं।

ये कैसी राष्ट्रीयता है कि पूरे देश को ही नोटबंदी के नाम पर लाइन में लगा दिया है। नोटबंदी को कालाधन पर सर्जिकल स्ट्राइक बताया गया था, लेकिन 50 दिन बाद अनुमानित कालाधन का 6 प्रतिशत से भी कम कैश सका। (डॉ.चौधरी, समारोह की अध्यक्षता कर रहे थे।)।
उनकी मांग रही-केंद्र सरकार, डिजिटल भुगतान पर लगने वाले शुल्क को तुरंत वापस ले। डिजिटल लेन-देन और बायोमेट्रिक डाटा को तुरंत सुरक्षित करे, ताकि लोगों का बैंक एकाउंट और निजी आंकड़ा सुरक्षित रहे। अभी विदेशी कंपनियों के माध्यम से आंकड़े सुरक्षित नहीं हैं।
मेरे एक रिश्तेदार अचानक बीमार हो गए। नोटबंदी के दौरान ही उनकी मौत हो गई। उनके परिवार वालों का फोन आया कि अंतिम संस्कार के लिए पैसे नहीं हैं। कुछ कीजिए। कैशलेस व्यवस्था का यही फायदा है?
केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने कहा-अशोक जी, अपनी ही पार्टी (कांग्रेस) को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। वे देश में कांग्रेस के 60 वर्षों के शासनकाल की नाकामी को उजागर कर रहे हैं। सबका खाता नहीं खुला, तो जिम्मेदार कौन है?
कांग्रेस ने बेनामी संपत्ति या कालाधन पर रोक के कानून को लागू नहीं किया। हम ऐसा कर रहे हैं। कालाधन रोकने के लिए नोटबंदी हुई। डिजिटल लेन-देन से कर की चोरी रुकेगी। (राधामोहन सिंह, समारोह के मुख्य अतिथि थे।)। उन्होंने इशारों में बिहार सरकार पर भी निशाना साधा।
कहा-मेरे जिला (पूर्वी चंपारण) में हर माह किसी दुकानदार से लूटपाट होती है। कैश लेस भुगतान होगा तो इस प्रकार की घटना रोकी जा सकेगी। 125 करोड़़ की आबादी में 2015-16 में सिर्फ 3.7 करोड़ लोगों ने रिटर्न फाइल किया।
आमजन नोटबंदी के समर्थन में हैं। अब घर खरीदना सस्ता होगा। किसानों को सस्ता ऋण देने के लिए नाबार्ड को 20 हजार करोड़ मिला। रबी फसल के लिए 60 दिन का कर्ज बिना सूद का मिला। ग्रामीण आवासों में वृद्धि की गई।
 

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