आर्म्स बना यहां स्टेट्स सिंबल, फौजियों के नाम से करा रहे लाइसेंस इश्यू

  • 09 Jan, 2017
  • priti singh

PATNA: गया में आर्म्स रखना यहां के लोगोंके लिए स्टेटस सिंबल बन गया है। नागालैंड सहित पूर्वोत्तर राज्यों से बने आर्म्स लाइसेंस पर सरकार अभी अनिर्णय की स्थिति में है।

इधर फौजियों को जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों से बड़े पैमाने पर आर्म्स लाइसेंस निर्गत होने लगे हैं। एक व्यक्ति को तीन-तीन आर्म्स का लाइसेंस हैं। फौजी इन लाइसेंसों पर आर्म्स खरीद भी रहे हैं।
परंतु अपने साथ न रखकर पैतृक घर पर इन्हें छोड़ रखा है। परिजन इसे लेकर घूम रहे हैं। ऐसे हथियार परिजनों के लिए स्टेटस सिम्बॉल बन गया है।
फौजियों को दिए जाने वाले आर्म्स लाइसेंस, उन पर संधारित हथियारों की संख्या और जिले में इसकी मौजूदगी की पुलिस-प्रशासन को कोई जानकारी नहीं है।
जो फौजी रिटायर होकर घर आ गए और ओडी पंजी में प्रविष्टि के लिए डीएम को आवेदन दिया। जम्मू-कश्मीर से निर्गत संबंधित जिलों से लाइसेंस का क्षेत्र उसी जिला का है। भले ही उस पर ‘कीप एंड कैरी’ का मुहर लगा है।
उन्हें अपने गृह जिले में लाने और ले जाने की छूट है। यानी वे जहां रहेंगे, वहीं हथियार रखना वैध होगा। जम्मू-कश्मीर से निर्गत अधिकांश आर्म्स लाइसेंस में फौजियों की पत्नी को रिटेनर बनाया गया है। संभवत: इसी को आधार बनाकर ऐसे हथियार गृह जिले में रखे जा रहे हैं।
फौजियों के नाम ऐसे आर्म्स लाइसेंस ज्यादातर जम्मू-कश्मीर के उधमपुर, कठुआ, श्रीनगर, जम्मू, रामबन और राजौरी सहित कई अन्य सीमा क्षेत्र के जिलों से बड़े पैमाने पर निर्गत हो रही है।
इसके अलावा नागालैंड एवं अन्य पूर्वोत्तर राज्यों से भी धड़ल्ले से आर्म्स लाइसेंस निर्गत हो रहे हैं।फौजियों के लाइसेंस पर संधारित आर्म्स उनके पैतृक घरों में हैं। स्वाभाविक है इसका इस्तेमाल परिजन ही कर रहे हैं।
इसका गलत इस्तेमाल भी किया जा सकता है। इन हथियारों से यदि कोई अपराध होता है, तो साक्ष्य को छुपाया भी जा सकता है। पुलिस महकमा को इसकी कोई जानकारी नहीं है।

फौजियों के नाम बने लाइसेंस पर संधारित आर्म्स गया जिले में भी सैकड़ों की संख्या में हैं। जिलाधिकारी कार्यालय के आर्म्स सेक्शन के ओडी पंजी में इसे दर्ज कराने के दर्जनों मामले लंबित भी हैं। राज्य सरकार का दिशा-निर्देश, गाइड-लाईन और आर्म्स रूल स्पष्ट है।
इसलिए ऐसे आर्म्स लाइसेंस की प्रविष्टि नहीं हो पा रही है। 17 आर्म्स रूल 2016 के मुताबिक यदि कोई लाइसेंसी अस्थायी या स्थायी तौर पर छह माह के लिए अपना निवास बदलता है तो उसे उस जिले के डीएम के यहां फॉर्म बी-1 में आवेदन देना होगा।
20-2016 के अनुसार रिटेनर का प्रावधान समाप्त कर दिया गया है। अपने साथ रहने वाले निकटतम ऐसे परिजन, जिनके नाम कोई आर्म्स लाइसेंस नहीं है, उन्हें एडिशनल लाइसेंसी बनाया जा सकता है।
गया के जिला पदाधिकारी कुमार रवि ने बताया कि जिस फौजी के नाम निर्गत लाइसेंस का वैलिडिटी क्षेत्र ऑल इंडिया नहीं है, उसे अपने घर में वे नहीं रख सकते है।
वे जहां रहेंगे, वहीं आर्म्स रखना है। ऐसे मामले यदि संज्ञान में आएंगे तो आर्म्स एक्ट के विहित प्रावधानों के मुताबिक उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
आर्म्स रूल में संशोधन किया गया है। विशिष्ट लोगों को अब जिला पदाधिकारी ही हथियारों का लाइसेंस पूरे भारतवर्ष क्षेत्र के लिए निर्गत कर सकते हैं।
इसमें केन्द्रीय मंत्री, लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य, केंद्रीय पारा मिलिट्री अथवा मिलिट्री के सर्विस होल्डर, ऑल इंडिया सर्विस के अधिकारी तथा विशिष्ट श्रेणी के खिलाड़ी को शामिल किया गया है।
 

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