वाल्मीकिनगर के दिन बहुरेंगे!

  • 09 Jan, 2017
  • priti singh

SUKANT: बिहार के एकमात्र बाघ अभयारण्य वाल्मीकिनगर ब्याघ्र परियोजना के दिन बहुरने की उम्मीद जग गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दो दिनों के सप्ताहांत (वीकेंड) दौरे पर यहां आए हैं।

मुख्यमंत्री ने  भारत नेपाल और उत्तर प्रदेश की सीमा पर बसे इस वन क्षेत्र में आए और जंगल के विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण किया। अपने प्रवास के अंत होते-होते मुख्यमंत्री ने इस क्षेत्र को गंडक व अन्य छोटी नदियों के कटाव से बचाने, इसे पर्यावरण पर्यटन (इको टूअरिज्म) क्षेत्र के तौर पर विकसित करने व एक सर्किट बनाने के साथ-साथ इस क्षेत्र में सुविधाओं के विस्तार की परियोजना तैयार करने का निर्देश दिया।
कटाव के हालात ऐसे हैं कि मुख्यमंत्री को हेलीकॉप्टर भेज कर जल संसाधन मंत्री राजीवरंजन सिंह ऊर्फ ललन सिंह को पटना से वाल्मीकिनगर बुलाना पड़ा।
मुख्यमंत्री ने अपने दो दिनों के प्रवास में इस ब्याघ्र परियोजना के विभिन्न वन क्षेत्रों का दौरा किया , इस क्षेत्र के पुराने मंदिरों को देखा, प्राचीन वृक्षों से रू-ब-रू हुए और गंडक की धारा में नौका विहार किया।
उनके साथ राजनेता नहीं, मुख्यसचिव अंजनी कुमार सहित अधिकारियों का दल था। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह क्षेत्र अनुपम और मनोरम है। यहाँ घूमने और देखने के लिए बहुत कुछ है। इसके लिए सुविधाएं विकसित की जानी चाहिए।
टूरिस्ट सर्किट बनया जाए। यहाँ कौलेश्वर व जटाशंकर महादेव मंदिरों को बेहतर सड़कों से जोड़ा जाए। प्राचीन स्थलों और पेड़ व वनस्पति गंडक के कटाव से बचाया जाए।
मुख्यमंत्री अपने मंत्रिपरिषदीय सहयोगी ललन सिंह को कटाव से इस क्षेत्र को बचाने की ठोस परियोजना तैयार करने को कहा। वस्तुतः मुख्यमंत्री की इस यात्रा के साथ पहली बार बिहार सरकार इस पर्यटन स्थल की ओर गंभीरता से मुखातिब दिख रही है।
हालाँकि राज्य सरकार नालंदा जिला के राजगीर में एक नया सफारी विकसित कर रही है। मुख्यमंत्री लंबे अंतराल के बाद इस क्षेत्र में आए थे। 2013 में इसी वन क्षेत्र के नौरंगिया में पुलिस ज्यादती के विरोध में आंदोलनकारी थारू आदिवासियों पर पुलिस ने फायरिंग की थी जिसमें नौ आदिवासियों की मौत हो गई थी।
उस घटना के बाद पहली बार इस क्षेत्र में आए हैं। यह क्षेत्र थारू आदिवासी बहुल है। इस मामले में गठित जाँच आयोग की रिपोर्ट आ गई है और पीड़ित परिवारों को मुआवजा दे दिया गया है। फिर भी अधिकारियों ने काफी सतर्कता बरती थी और य़ारू बहुल इलाके से मुख्यमंत्री को बचाने की हसरत कोशिश की थी।
फिर भी, मुख्यमंत्री को इस प्रवास के दौरान पानी, सड़क और बिजली के लिए महिलां के आक्रोश का सामना करना पड़ा। वालमीकिनगर बाजार और आसपास की महिलाओं ने सड़क जमा कर पानी की समस्या से उन्हें अवगत कराया कि पेयजल के उन्हें दो-दो किलींटर तक जाना पड़ाता है।
वन क्षेत्र में उन्हें जलावन नहीं मिलते। कटैया पनबिजली के बेहतर इस्तेमाल न होने कारण उन्हें बिजली नहीं मिलती। यह जानना जरूरी है कि नेपाल के चितवन अभयारणय से जुड़ो वालमीकिनगर ब्याघ्र परियोजना का क्षेत्र जैव विविधता के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता रहा है।
बाघ सहित अनेक दुर्लभ जंगली जानवरों का यह बसेरा रहा है। जंगली भैसों का बड़े वन क्षेत्र में इसकी गिनती होती है और मैना का यह कभी सबसे बड़ा बसेरा था। यह इलाका बेंत के वनं के लिए प्रसिद्ध रहा है इसीलिए बेतिया शहर है।
पर यह भी यथार्थ है यह इलाका दुर्लभ वन्यजीवों, वनस्पतिय़ों और लकड़ी के अंतरराष्ट्रीय तस्करों का क्रीड़ा केन्द्र बन गया है। इसे सुरक्षित रखने की दिशा में किसी सरकार ने कोई ठोस पहल अब तक नहीं की है।
देखना है, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का यह प्रवास इस वन क्षेत्र के भाग्य को किस हद तक बदलता है, बदलता भी है या नहीं।
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं 
 

 

Leave A comment

यह भी देखेंView All