दारोगा ने किया ऐसा खुलासा कि उड़ गए DSP के भी होश

  • 10 Jan, 2017
  • priti singh

PATNA: एक दारोगा ने एक केस के मामले में सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा कि तुम नहीं जानते कि घूस का पैसा एसपी साहेब तक जाता है। 'अरे तुमलोग नहीं जानता है कि केस डायरी में केतना खर्चा पड़ता है।

बुद्धि लगाना पड़ता है। उ सब खर्चवा तो देना होगा ना। इसके बाद जब नाम हटा दिए तो डीएसपी पूछेगा काहे हटाए, इंस्पेक्टर साहेब पूछेंगे।
तुमलोग नहीं समझ सकता कि हमलोगों पर केतना दबाव है। हमको तो बस 20 हजार ही बचेगा।
बाकी खर्चा तो इंस्पेक्टर, डीएसपी और एसपी को देना पड़ता है। ये बोल हैं -फतुहा थाने के दारोगा प्रदीप कुमार के, जो कांड संख्या 199/16 का अनुसंधानकर्ता है। उसने कांड के आरोपियों के रिश्तेदार से फोन पर जो बातचीत की, उसका अंश है।
फतुहा थाने की पुलिस से प्रताडि़त होकर परिजन सोमवार को पुलिस कप्तान मनु महाराज से मिलने आए थे। उनके पास एक दर्जन से अधिक ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग थी, जिसमें दारोगा की बातें और उसकी हरकतें कैद हैं।
बताते चलें कि 17 मई 2016 को फतुहा थाना क्षेत्र में एक युवती की क्षत-विक्षत लाश बरामद हुई थी। उसी दिन पुनपुन थाना क्षेत्र में भी एक युवक का शव बरामद हुआ। युवती की पहचान हो गई, पर युवक का कुछ पता नहीं चला।
दोनों मामलों को एक साथ जोड़कर पटना पुलिस ने फर्जी खुलासा कर दिया, जिसमें तीन लोग गिरफ्तार कर जेल भेज गए। पुलिस ने कहानी बताई थी कि दोनों एक दूसरे से प्यार करते थे।
लड़की शादीशुदा थी और उसका प्रेमी ससुराल में उससे मिलने गया। ससुराल वालों ने दोनों को पीट-पीटकर मार डाला और शव को अलग-अलग जगह पर फेंक दिया। युवती के पिता की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज की गई, जिसमें उसके ससुराल वालों को अभियुक्त बनाया गया।
पुलिस ने युवती के पति, ससुर और गांव के एक व्यक्ति को जेल भेज दिया। इसके 60 दिनों के बाद युवती का असली प्रेमी पकड़ा गया, जिसने हत्या करने की बात स्वीकार ली। बावजूद इसके युवती के ससुराल वाले अब तक जेल से नहीं छूटे।
इसकी मुख्य वजह है कि अनुसंधानकर्ता को कोर्ट में डायरी भेजने के लिए रिश्वत नहीं दी गई। ऑडियो रिकॉर्डिंग में अनुसंधानकर्ता ने जेल गए लोगों को निर्दोष बताया है और घूस में एक लाख रुपये न मिलने से नाराज होकर कोर्ट में केस डायरी समर्पित नहीं करने की बात स्वीकार की है।
असली हत्यारे के पकड़े जाने के बाद निर्दोष लोगों को जेल से रिहा कराने के लिए कुछ लोग फतुहा थाने पहुंचे। उन लोगों ने अनुसंधानकर्ता प्रदीप कुमार से बात की और केस डायरी में सच लिखने का आग्रह किया।
बातचीत के दौरान परिजनों की ओर से किसी ने कहा कि डायरी मिल जाएगा तो जज साहब मामला खत्म कर देंगे। इस पर दारोगा भड़क गया और बोला, 'कोई माई का लाल नहीं है, जो केस से नाम हटा देगा। जो करेगा, दारोगा करेगा।
डायरी लिखने में खर्च लगता है। हम मजबूर हैं, इसलिए निर्दोष को जेल भेजना पड़ा। परिजनों से बातचीत के दौरान दारोगा प्रदीप कुमार ने 25 हजार रुपये लेने की बात स्वीकार की है।
उसने कहा है कि एक बार 12, दूसरी बार छह और ऐसे ही करके उसे अशोक बाबू (जेल में बंद आरोपियों के रिश्तेदार) के हाथ से कुल 25 हजार रुपये मिले हैं। लेकिन इतने में काम नहीं होगा। कम से कम एक लाख रुपये देने होंगे।

जोनल आईजी नैयर हसनैन खान ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। ऐसे भ्रष्ट अफसरों को महकमे से बाहर किया जाए। दारोगा को तत्काल निलंबित कर एसएसपी से कार्रवाई करने को कहा गया है।
 

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