नोटबंदी-शराबबंदी के रास्ते नई राजनीति

  • 10 Jan, 2017
  • Basant kumar

SUKANT : बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भारतीय जनता पार्टी के टूटे रिश्ते को जोड़ने में नोटबंदी और शराबबंदी कारगर माध्यम बन रहा है।

सूबे में शराबबंदी को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नीतीश कुमार की जोरदार तारीफ का सीधा असर सूबे की राजनीति में दिखने लगा है। शराबबंदी को लेकर जागरण अभियान के सिलसिले में जनता दल(यू) ने 21 जनवरी को मानव श्रृखंला बनाने की घोषणा काफी पहले से कर रखी है। भाजपा ने इस मानव-श्रृखंला बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने की अब घोषणा की है। इधर, नोटबंदी को लेकर जद(यू) के स्टैंड के निर्धारण की बैठक कोई एक पखवारे के लिए टाल दी गई है। यह बैठक अब प्रस्तावित मानव श्रृखंला के बाद 23 जनवरी को होगी।
यह बताना अप्रासंगिक नहीं होगा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह आज पटना प्रवास में हैं।  भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय ने कल देर शाम बताया चूंकि उनकी पार्टी शरबबंदी के पक्ष में रही है, इसीलिए मानव श्रृखंला में उसके नेता कार्यकर्त्ता शामिल होंगे।
 
उस दिन प्रदेश भाजपा की कार्यकारिणी की बैठक सीवान में है, लिहाजा सभी बड़े नेता और कार्यकारिणी के सदस्य वहीं मानव श्रृखंला में भाग लेंगे। भाजपा के सभी जिला इकाइयों को इसमें भाग लेने के बारे में उपयुक्त निर्देश दे दिया गया है।
हालांकि इससे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सभी दलों से इस अभियान में शामिल होने की अपील की थी। इस अपील का प्रभाव हो या कुछ और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने देर शाम इस मानव श्रृखंला में सक्रिय साझेदारी निभाने की घोषणा कर दी। दिलचस्प तथ्य यह है कि कल देर रात ही सत्तारूढ़ महागठबंधन के सबसे बड़े घटक राष्ट्रीय जनता दल और सबसे छोटे साझेदार काँग्रेस ने भी प्रस्तावित मानवश्रृखंला में साझेदारी की घोषणा की है। कांग्रेस ने इस अभियान को भाजपा के समर्थन को सत्तारूढ़ महागठबंधन की जीत की संज्ञा दी है।
शराबबंदी को लेकर भाजपा के इस रूख की सार्वजनिक अभिव्यक्ति के पहले ही जद(यू) ने नोटबंदी को लेकर अपने स्टैंड की समाक्षा की बैठक टाल देने की घोषणा कर दी थी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नोटबंदी की घोषणा को समर्थन देने की बात 9 नवम्बर को ही कही थी और बेनामी संपतिति पर कार्रवाई के लिए प्रधानमंत्री से अपील की थी।
हालांकि उनकी सरकार के अन्य घटक राजद और कांग्रेस इससे लोगों की हो रही परेशानी को लेकर सड़क पर उतर गई है। एनडीए से बाहर के प्रायः सभी क्षेत्रीय दल नोटबंदी को लेकर सड़क पर हैं। इस राजनीतिक परिदृश्य में जद(यू) ने कहा था कि प्रधानमंत्री ने पचास दिनों का समय माँगा है। इसके बाद जद(यू) हालात की समीक्षा करेगा और अपने स्टैंड तय करेगा। फिर, जद(यू) ने प्रकाश पर्व के बाद इस मसले पर विचार की बात कही थी।
अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साफ किया है कि यह बैठक 23 जनवरी को होगी। पर, बिहार प्रदेश जद(यू) अध्यक्ष वशिष्ठनारायण सिंह ने कहा कि उनका दल नोटबंदी से उपजे हालात की जरूर समीक्षा करेगा। पर, वास्तविकता तो यही है कि नोटबंदी से उपजी परेशानी निरन्तर कम होती जा रही है। वशिष्ठ बाबू के इस बयान के बाद जद(यू) के स्टैंड के बारे में अनुमान लगाने को बहुत कुछ नहीं बचता है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)
 

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