जैविक उद्यान में बदलेगा जनियामारा जंगल: मंत्री

  • 09 Jan, 2017
  • Amitesh kumar
  • Roshan Kumar Jha

RAMGARH : रजरप्पा स्थित जनियामारा जंगल के पास वन विभाग द्वारा सोमवार को वृक्ष रक्षा बंधन सह पर्यावरण मेला का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पेयजल स्वच्छता एवं जल संसाधन मंत्री चंद्रप्रकाश चैधरी व विशिष्ठ अतिथि रामगढ जिप अध्यक्ष व्रहमदेव महतो सहित अन्य लोग उपस्थित थे। मौके पर मुख्य अतिथि ने कहा कि जनियामारा जंगल को जैविक उद्यान के रूप में विकसित किया जाएगा। ताकि रजरप्पा स्थित छिन्नमस्तिके मंदिर पहुंचने वाले पर्यटकों को इस उद्यान में भी जाने का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा आगे सभी के प्रयास से जंगल को कटने से बचाना होगा। क्योंकि जंगलों की कटाई के कारण पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। जिसका असर मानव जीवन में पड रहा है। इसलिए मानव जीवन की रक्षा के लिए पेड पौधों को कटने से बचाना होगा।

कार्यक्रम को विशिष्ठ अतिथि रामगढ जिप अध्यक्ष व्रहमदेव महतो, रामगढ डीएफओ केके त्रिपाठी, विधायक प्रतिनिधि अमृतलाल मुंडा, चितरपुर प्रमुख कुमारी जुली गुप्ता, भुचूंगडीह मुखिया प्रभा देवी, आजसू नेता राजेश विश्वकर्मा आदि ने संबोधित किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि सहित उपस्थित सभी गणयमान्य लोगों ने पेड को रक्षा सूत्र बांधकर उन्हें बचाने का संकल्प लिया। इससे पूर्व अतिथियों के यहां पहुंचने पर उनका स्वागत आयोजन समिति के सदस्यों द्वारा माल्र्यापण व बुके देकर किया गय।

तत्पश्चात स्कूली छात्राएं द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का संचालन गौतम सिंह बम ने किया। मौके पर उप प्रमुख मुखलाल महतो, वन क्षेत्र पदाधिकारी रामगढ एके सिंह, गोला आरएल पासवान, वनपाल सुरेंद्र भगत, संजय कुमार, एसएन सिंह, चरकू राम, डाॅ संजय सिंह, वशीर अंसारी, जगरनाथ महतो, सुलेमान अंसारी, जीवन महतो, जगदीश महतो, जनक साव, ठाकुर दास महतो, भुन्नू महतो, राजकिशोर महतो, संजय केंवट, देवंती देवी, रेणु देवी, भागीरथ मानकी, सवित्री देवी, मालती देवी, शांति देवी, शंकर करमाली सहित कई मौजूद थे।

नुक्कड नाटक के माध्यम से लोगों को किया गया जागरूक

वन विभाग द्वारा जनियामारा जंगल में आयोजन वृक्ष रक्षा बंधन सह पर्यावरण मेले के दौरान पर्यावरण से संबंधित नुक्कड नाटक का आयोजन किया गया। इस दौरान नाटक मंडल के सदस्यों द्वारा शानदार नुक्कड नाटक प्रस्तुत कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। नुक्कड नाटक के माध्यम से उन्होंने लोगों को सिख दिया कि पेड पौधों में भी जीवन होता है। उन्हें काटने से जहां उन्हें तकलीप होती हैं। वहीं पर्यावरण पर भी इसका काफी असर पडता है।