मंत्री ने कैबिनेट की बैठक बीच में ही छोड़ दी, कहा- मुझे जेल नहीं जाना

  • 11 Jan, 2017
  • Abhijna verma

RANCHI : राज्य की बंद पड़ी 105 खदानों को पुराने लीज होल्डर को देने के फैसले का पहले ही विरोध जता चुके संसदीय कार्य मंत्री सरयू राय ने इस मुद्दे पर कैबिनेट की बैठक बीच में छोड़ दी। कहा कि जिन्हें जेल जाने का शौक है, वे इस फैसले का सपोर्ट करें।

 कैबिनेट की पिछली बैठक में यह फैसला किया गया था। उसमें सरयू राय नहीं थे। बताया जाता है कि कैबिनेट की मीटिंग शुरू होते ही उन्होंने कहा कि पिछली बैठक में लीज नवीकरण का जो फैसला लिया गया, उसे तुरंत वापस लेना चाहिए।
सरयू राय ने कहा कि जिन्हें जेल जाने का शौक है, वे इस फैसले का सपोर्ट करें। खदानों का लीज नवीकरण करना ही है तो विभाग करे। तभी एक मंत्री ने कहा कि एक बार जो हो गया, सो हो गया। इस पर राय ने कहा, संशोधन तो संविधान में भी होता है, यहां क्यों नहीं हो सकता है। गलती हुई है।

सीबीआई वाले पांच-दस साल के बाद भी खोद कर गड़बड़ी पकड़ लेते हैं। यह कहते हुए वे बैठक से बाहर निकल गए।
29 दिसंबर को मुख्यमंत्री को लिखी थी चिट्‌ठी। सरयू राय ने मंगलवार को कैबिनेट की बैठक छोड़ने के बाद तो कोई दलील नहीं दी, मगर 29 दिसंबर को मुख्यमंत्री को लिखी चिट्ठी से उनका स्टैंड साफ होता है।

इसमें लिखा है कि वर्षों से बंद पड़ी 105 खदानों को खोले जाने पर कैबिनेट को सभी पहलुओं पर गौर करना चाहिए। इस निर्णय पर फिर से विचार करने की जरूरत है।
मैं सरकारी दौरे पर बाहर था। लौटा तो, पता चला कि कैबिनेट ने खदानों को खोलने और पुराने लीजधारी को लीज का अवधि विस्तार देने पर मंजूरी दे दी है।

कैबिनेट का काम नीति बनाना है और संबंधित विभाग को उसके कार्यान्वयन के लिए काम करना है। कैबिनेट ने जो फैसला लिया है उसमें क्रियान्वयन की बात हो गई है। कैबिनेट को केवल दीर्घकालीन नीति बनानी चाहिए थी।ऐसा नहीं है कि कैबिनेट कोई भी निर्णय कर ले। । कोई भी फैसला एमएमडीआर एक्ट और नियमावली के अनुरूप ही होने चाहिए, जिससे बाद में कोई अंगुली नहीं उठा सके।

खदानों के नवीनीकरण के विषय में मुझे मंत्री होने के नाते जो बातें सरकार के ध्यान में लानी चाहिए, वह मैंने कैबिनेट में रख दी हैं। बाहर कुछ नहीं बोलूंगा। मेरी नाराजगी की कोई बात नहीं है।
सरयू राय, खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री 

Leave A comment

यह भी देखेंView All