इस मंदिर में मां के दर्शन से जल्द हो जाती है शादी

  • 11 Jan, 2017
  • Abhijna verma

RANCHI : कहते हैं जो भी भक्त मां अवंतिका देवी पर सिन्दूर व देशी घी का चोला चढ़ाता है, माता अवंतिका देवी उसकी समस्त मनोकामना पूर्ण करती हैं। अविवाहित कन्याएं यदि ऐसा करें तो उनकी विवाह की इच्छा जल्द ही पूरी होती है।

कहते हैं जो भी भक्त मां अवंतिका देवी पर सिन्दूर व देशी घी का चोला चढ़ाता है, माता अवंतिका देवी उसकी समस्त मनोकामना पूर्ण करती हैं। अविवाहित कन्याएं यदि ऐसा करें तो उनकी विवाह की इच्छा जल्द ही पूरी होती है। वह इसीलिए क्योंकि यहां रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण को पति रूप में प्राप्त करने के लिए देवी का पूजन किया था।
रुक्मिणी से श्रीकृष्ण ने 'हरण विवाह' किया था। उन्होंने रुक्मिणी का जिस मंदिर से हरण किया था। वह मंदिर वर्तमान में मौजूद है। इस मंदिर का नाम है 'अवंतिका देवी मंदिर'। यह मंदिर उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर जिले में अनूपशहर तहसील के जहांगीराबाद से करीब 15 किमी. दूर गंगा नदी के तट बना हुआ है।
महाभारत और श्रीमद्भागवद में इस जगह का उल्लेख मिलता है। अवंतिका देवी का यह मंदिर काफी प्रसिद्ध है। जहां दूर-दूर से मां के भक्त दर्शनार्थ आते हैं। मान्यता है कि इस मंदिर में अवंतिका देवी जिन्हें अम्बिका देवी भी कहते हैं साक्षात् प्रकट हुई थीं।
मंदिर में दो मूर्तियां हैं, जिनमें बाईं तरफ मां भगवती जगदंबा की है और दूसरी दायीं तरफ सतीजी की मूर्ति है। यह दोनों मूर्तियां 'अवंतिका देवी' के नाम से प्रतिष्ठित हैं। मां भगवती अवंतिका देवी को पोशाक और चुनरी नहीं चढ़ाई जाती है। बल्कि सिन्दूर व देशी घी का चोला (आभूषण) चढ़ाया जाता है।
महाभारत काल में यह मंदिर अहार नाम से जाना जाता था। पौराणिक धर्म ग्रंथों के मुताबिक, यहां रुक्मिणी रोजाना गंगा किनारे स्थापित अवंतिका देवी के मंदिर में पूजा करने आती थीं। इसी मंदिर पर श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का मिलाप हुआ था।
रुक्मिणी के भाई रुकन और पिता ने उनकी शादी शिशुपाल से तय कर दी थी। रुक्मिणी ने यह बात अवंतिका मंदिर के पुजारी से माध्यम तक पहुंचा दी। और फिर कृष्ण ने यहां आकर रुक्मिमी का हरण किया था।
महाराष्ट्र के पंढरपुर जहां विट्ठल( श्रीकृष्ण के अवतार) विराजे हैं। वह यहां मूर्तिरूप में हैं। मूर्ति का रंग काला है। उनके दोनों हाथ कमर पर होते हैं। विट्ठल के साथ रुक्मिणी भी विराजमान रहती हैं और भक्त उनका पूजन कर आशीर्वाद लेते हैं। महाराष्ट्र के अलावा दक्षिण भारत के कई स्थानों पर भी विट्ठल के मंदिर हैं। 

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