यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर सरकार असमंजस में

  • 11 Jan, 2017
  • Basant kumar

PATNA : सरकारी कार्यालयों में कार्यरत अधिकारियों व कर्मचारियों के यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर बिहार सरकार असमंजस की स्थिति में है। एक तरह से कहा जाए तो यह कोड सरकार के लिए गले की फांस बन गई है।

यूनिफॉर्म को लेकर सरकार के अंदर एक राय नहीं है। राज्य मंत्रीपरिषद की बैठक में प्रस्ताव पारित होने के मुताबिक सरकार सिविल कोड के मुद्दे पर निर्णय की स्थिति में तो है, लेकिन बिन सबके राय-विचार और सहमति के इस मुद्दे पर एक राय नहीं बन सकती।
देश में सामाजिक आर्थिक और सांस्कृतिक स्तर पर अनेकता को लेकर यूनिफॉर्म सिविल कोड पर चर्चा जारी है। संविधान के अनुच्छेद 44 के मुताबिक कानून के समक्ष सबको बराबर अधिकार दिया गया है और भारत में रहने वाले सभी लोग एक कानून से गाइड होंगे। यह संविधान की मूल भावना में नहीं था, बावजूद इसके कुछ धर्म और संप्रदाय के लोगों को शरीयत के हिसाब से एक करने की इजाजत दी गई है।
विधि विभाग के 21 में रिफरेंस के मुताबिक राज्यों से एक समान नागरिक संहिता पर राय मांगी गई थी और राज्यों को 16 सूत्री प्रश्नावली के आलोक में जवाब तैयार कर केंद्र को भेजे जाने थे। राज्य सरकार के मुताबिक यह एक संवेदनशील विषय है और इस पर सभी धर्म जाति संप्रदाय के लोगों के साथ वृहद विचार विमर्श करने के बाद हम सहमति के आधार पर ही कोई फैसला लिया जा सकता है।
राज्य सरकार नए समीक्षा के दौरान यह पाया है कि किसी भी धर्म संप्रदाय जाति के लोगों के द्वारा इस विषय पर अब तक कोई राय नहीं व्यक्त की गई है। अलग-अलग धर्मों को मानने वाले लोग विवाह तलाक और उत्तराधिकार के लिए अलग-अलग नियम से बंधे हुए हैं और उसी के हिसाब से कानून फिल्म पर लागू है। ऐसे में यूनिफॉर्म सिविल कोड पर सब की राय जानने के बाद ही कोई निर्णय लिया जा सकता है।
 

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