शिलान्यास के तीन साल बीत जाने के बाद नहीं बनी सड़क

  • 11 Jan, 2017
  • Chandramani

NALANDA (Kumud Singh) : जब विकास के दावे किए जाने लगे तो एक नजर गांव की सड़क की ओर भी झांक लेनी चाहिए। तब सरकार व सरकारी दावे के फर्क में अंतर दिख जाएगा।

शिलान्यास के साढ़े तीन साल बीत गए, लेकिन सड़क का निर्माण नहीं हो पाया है। यह विडंबना चंडी प्रखंड के बिहारशरीफ-दनियावां मार्ग पर अवस्थित विशुनपुर गांव के लिए सड़क का सपना देखते-देखते ग्रामीणों की आंखे बंद सी गई है। शिलापट्ट व बोर्ड दोनों सड़क के रंग जैसी हो गयी है। वर्षों से पगडंडी रास्ते को पक्की सड़क में तब्दील करने के सपने देखने वाले गांव वालों ने काफी परेशानियां उठाई।
वर्षा के दिनों में नदी को पार कर आवागमन करते रहे हैं। लिंक पथ से सड़क के लिए लम्बा संर्घष किया, धरना दिया, वोट का बहिष्कार किया, तीन साल पहले तत्कालीन ग्रामीण कार्य मंत्री भीम सिंह का घेराव किया तब जाकर सड़क बनाने का आश्वासन गांव वालों को मिला।
लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिला 29 नवम्बर 2013 को चिरैया पुल से गांव तक सड़क निर्माण को लेकर आधारशिला रखी गई। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत लगभग करोड़ से ज्यादा की लागत से बनने वाली यह सड़क का निर्माण कार्य अक्टूबर 2014 में पुरी हो जानी चाहिए थी।
लेकिन विडंबना देखिए तीन साल बीत गए लेकिन नहीं बनी सड़क। बाद में लाल मिट्टी देकर उसे बराबर कर छोड़ दिया गया। गांव वाले सड़क को लेकर उदासीन हो गए हैं। यहां तक की अब वे उम्मीद ही छोड़ रखी है।
अगर सड़क बनी तो कैसी होगी इसकी कल्पना गांव वालों के समाने यह तो समय की गर्भ में है। बहरहाल क्या कारण रहा कि शिलान्यास के बाद भी सड़क का निर्माण नहीं हुआ।  

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