'वन स्टॉप सेंटर' रखेगा आधी आबादी को सेफ,एक छत के नीचे मिलेंगी सारी सुविधाएं

  • 12 Jan, 2017
  • priti singh

PATNA: पटना के छज्जूबाग स्थित महिला हेल्पलाइन सह वन स्टॉप सेंटर में एक छत के नीचे महिलाओं की हर समस्या के समाधान की व्यवस्था की गई है। यह चौबीस घंटे संगिनियों की सेवा में खुला रहता है।

महिला प्रताड़ना के किसी भी केस की शिकायत कभी भी और किसी भी स्थान से की जा सकती है। निर्भया फंड से तैयार इस सेंटर का उद्घाटन पिछले माह नौ दिसंबर को हुआ है।
इसमें ¨हसा से पीड़ित महिलाओं के लिए चिकित्सा, प्राथमिकी, आवास, सामाजिक व मनोवैज्ञानिक परामर्श की व्यवस्था की गई है। अल्पकाल के लिए पीड़ित को आश्रय के साथ-साथ भोजन, वस्त्र और अन्य आवश्यक प्रसाधन उपलब्ध कराना है।
कोई आपके साथ छेड़खानी, दु‌र्व्यवहार, ¨हसा आदि से परेशान करता है तो हेल्पलाइन नंबर 9771468024 पर तत्काल संपर्क कर सकती हैं। यह नंबर वन स्टॉप सेंटर का है। इसपर कॉल करते ही आपको तत्काल सहायता उपलब्ध करायी जाएगी।
यदि पुलिस या अन्य एजेंसियों की जरूरत पड़ी तो वह भी चंद मिनटों में आपके पास होगी। घरेलू ¨हसा को लेकर भी यहां शिकायत की जा सकती है। महिलाओं के इच्छानुसार ही पहले संबंधित पक्ष की काउंसिलिंग की जाएगी।
उसके बाद भी स्थिति में सुधार नहीं होने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसमें पीड़ित महिला को पूरे विश्वास में रखकर ही कार्रवाई की जाएगी। यदि आपको थाने में एफआइआर दर्ज कराने में परेशानी होती है तो उसका भी समाधान यहां होगा।
इस सेंटर में पीड़िता के रहने के लिए पांच बेड की भी व्यवस्था है। यदि पीड़िता की स्थिति संतोषजनक नहीं है तो उन्हें कुछ दिनों के लिए यहां रहने की व्यवस्था है। यह सुविधा पूरी तरह से मुफ्त होगी। सेंटर कर्मियों के अनुसार पीड़िता प्रारंभिक दौर में 4-5 दिनों तक रह सकती है।
इस दौरान उन्हें बेहतर करने के लिए हर सपोर्ट दिया जाएगा। इसके बाद भी स्थिति सामान्य नहीं होती तो पाटलिपुत्रा स्थित महिला अल्पावास केंद्र में स्थानांतरित होंगी।
सेंटर की प्रोजेक्ट मैनेजर और अतिरिक्त प्रभार पर नियुक्त प्रमिला कुमारी ने बताया कि वन स्टॉप सेंटर की अवधारणा काफी विस्तृत है। निर्भया जैसे दर्दनाक मामले को ध्यान में रखते हुए इसका शुभारंभ किया गया है।
ताकि अगर किसी महिला को तत्काल किसी मदद की जरूरत हो तो उसे इस सेंटर से तत्काल मदद मिलेगा। पीड़ित महिला को एक कॉल पर सारी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। यह महिलाओं के अधिकार की सुरक्षा में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने बताया कि जानकारी के अभाव में अभी इसका लाभ ज्यादा पीड़िता नहीं ले पा रहीं हैं।

अभी तक दो केस निपटाए जा चुके हैं। पहले मामले में एक लड़की ने गांधी मैदान से कॉल कर छेड़खानी की शिकायत की थी, जिसे तत्काल सेंटर की गार्ड ने जाकर ऑन द स्पॉट पीड़िता की सहायता की थी।
इसके अलावा एक घरेलू ¨हसा का केस दर्ज हुआ था जिसमें पति पत्नी को काफी परेशान करता था। इसमें पीडि़ता को सहायता और काउंसिलिंग प्रदान की गई। दोनों मामले की मॉनीट¨रग सेंटर के द्वारा की जा रही है।

वन स्टॉप सेंटर खुल तो गया है, लेकिन इस सेंटर पर बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। इसमें अल्पावास के लिए बेड तो लगा दिया गए हैं, लेकिन पीड़िताओं के लिए भोजन और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था अभी दुरुस्त नहीं की गई है।
वहीं, कर्मियों की कमी के कारण भी परेशानी हो रही है। निर्धारित कर्मियों की बहाली नहीं की गई है। प्रशिक्षित गार्ड और कर्मियों की नियुक्ति नहीं होने से इस विस्तृत अवधारणा पर खुले इस सेंटर की बातें बेमानी सी लग रही हैं।
अभी पीड़ितों के लिए महज पांच बेड ही उपलब्ध है। यहां अभी तीन कर्मी ही कार्यरत हैं जिसमें एक प्रोजेक्ट मैनेजर और दो काउंसलर हैं। नाइट गार्ड की संख्या चार है।

प्रोजेक्ट मैनेजर प्रमिला कुमारी ने कहा कि ये केंद्र खोल तो दिया गया है। लेकिन इसकी अवधारणा को साकार करने के लिए एक प्रशिक्षित टीम की आवश्यकता है।
इस तरह के कार्य में तत्काल सुविधा की व्यवस्था होनी चाहिए। यहां सभी कर्मी महिलाएं ही हैं अगर प्रशिक्षित कर्मी ही नहीं हैं तो फिर उन महिलाओं पर भी ¨हसा की गुंजाइश बनी रहेगी।
 

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