20,000 ‘फर्जी’ छात्रों के नाम पर हुआ मैट्रिक परीक्षा में रजिस्ट्रेशन

  • 12 Jan, 2017
  • priti singh

PATNA: अभी तक बिहार विद्यालय परीक्षा समिति में फेल-पास और टॉपर बनाने का खेल ही सामने आया था, लेकिन इस कड़ी में अब पैसे लेकर फर्जी रजिस्ट्रेशन करवाने का नया मामला भी जुड़ गया है।

 एक नहीं, दो नहीं। बल्कि 20 हजार नकली छात्र-छात्राएं पकड़ में आये हैं, जिन्होंने फर्जी तरीके से अप्रैल, 2016 में नौवीं का परीक्षा फॉर्म भर दिया था। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने नौवीं की परीक्षा का ऑनलाइन फॉर्म भरनेवाले तमाम परीक्षार्थियों का बिना जांच के मैट्रिक में रजिस्ट्रेशन कर दिया था।
लेकिन, अब जब मैट्रिक का ऑनलाइन परीक्षा फॉर्म भराया जा रहा है, तो यह फर्जीवाड़ा पकड़ में आ रहा है। समिति की मानें, तो चेकलिस्ट तैयार करने के दौरान ये नकली परीक्षार्थी पकड़ में आये हैं। अप्रैल, 2016 में नौवीं का परीक्षा फॉर्म ऑनलाइन भरा गया था।

उस समय समिति के तत्कालीन अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद और सचिव हरिहर नाथ झा की मिलीभगत से 20 हजार छात्र-छात्राओं का फर्जी तरीके से परीक्षा फॉर्म भरवा दिया गया।
सूत्रों की मानें, तो नौवीं का ऑनलाइन परीक्षा फॉर्म भरने के दौरान भी कंप्यूटर इन नकली परीक्षार्थियों के परीक्षा फॉर्म को नहीं ले रहा था। लेकिन तत्कालीन अध्यक्ष और सचिव ने अलग तरीके से इनके परीक्षा फॉर्म भरवा दिये थे।
मामला सामने आने के बाद अब समिति की ओर से स्कूल के प्रधानाध्यापक को नकली छात्र और छात्राओं के विवरण का मिलान स्कूल अभिलेख से करने को कहा है। जिन छात्रों के विवरण में गड़बड़ी पायी जा रही है, उसे सही करके बोर्ड को ऑनलाइन ही भेजना है।


उत्तर पुस्तिका और परीक्षा केंद्र बदल कर अयोग्य को टॉपर बना दिया गया था। यह इंटर साइंस के साथ आर्ट्स और कॉमर्स में भी किया गया था। बोर्ड में अयोग्य व्यक्तियों को संविदा पर नियुक्त कर लिया गया था। इनमें से कई को तो महत्वपूर्ण पदों पर तैनात किया गया था।

इंटर और मैट्रिक की परीक्षाओं के लिए कम क्वालिटी के पेपर की छपाई करवा कर महंगा टेंडर दिया गया था। इसके अलावा अग्निशमन यंत्र, सीसी टीवी कैमरा आदि लगाने में भी मोटी कमाई की गयी थी।

213 वैसे स्कूल-कॉलेजों को बिना जांच-पड़ताल के ही मान्यता दे दी गयी, जो मानक को पूरा नहीं कर रहे थे। बाद में स्थल जांच के बाद कई की संबद्धता रद्द कर दी गयी।

नकली छात्रों के सबसे अधिक मामले वैशाली और नालंदा से मिले हैं। सूत्रों की मानें, तो इन जिलों के अधिकतर स्कूलों से नकली छात्रों का नौवीं का परीक्षा फाॅर्म भरवाया गया था। ये किसी स्कूल के छात्र नहीं थे, बल्कि बाहर के छात्र थे। इन छात्रों से पैसे लेकर नौंवी का परीक्षा फाॅर्म समिति की ओर से भरवाया गया था।

मामले की जांच करवायी जा रही है। स्कूल को एक मौका दिया जा रहा है कि वह छात्रों के विवरण को सही करें। पर जिन छात्रों का रजिस्ट्रेशन फर्जी तरीके से हुआ है, उन्हें फाॅर्म नहीं भरने दिया जायेगा।
 

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