इस मंदिर में मां के सिंहासन की होती है पूजा, लाखों भक्तों की लगती है भीड़

  • 12 Jan, 2017
  • priti singh

PATNA: दरभंगा के बेनीपुर अनुमंडल से तीन किलोमीटर दूर नवादा गांव के पश्चिमी छोर पर स्थित देवी हावीडीह मंदिर का मिथिलांचल के सिद्धपीठों में अपना एक अलग आध्यात्मिक महत्व है।

इस मंदिर की प्राचीनता और देवी की प्रतिमा के संबंध में एक जनश्रुति के अनुसार ऋषि लक्ष्मणानंद द्वारा राजा विक्रमादित्य के शासन काल में इसकी स्थापना की गई थी। देवी की प्रतिमा अष्ट भुजा वाली और काले रंग की है।
बहेड़ी प्रखंड के हावीडीह गांव के एक भक्त प्रतिदिन कमला नदी तैर कर पूजा करने जाया करते थे। वृद्धावस्था में असमर्थ होने पर उन्होंने मां से हावीडीह चलने का अनुरोध किया और प्रतिमा उठाकर अपने गांव हावीडीह में स्थापित कर लिया।
अगले दिन गांव वालों को पता चलने पर गांव वाले प्रतिमा वापस लाने की तैयारी करने लगे। इसी बीच नवादा मंदिर के पुजारी दामोदर ठाकुर को देवी ने स्वप्न दिया कि वे अपनी इच्छा से हावीडीह आई हैं।
यहां गांव के लोग उनके सिंहासन की ही पूजा करें। इसी से उनकी मनोकामना पूरी होगी। तब से भगवती के सिंहासन की ही पूजा आज तक होती आ रही है। यहां दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए आते है।
नवरात्र में यहां विशेष पूजा होती है। इन्हें हयहट्ट देवी के नाम से भी जाना जाता है। अष्टमी की निशा पूजा में सिंहासन को लाल फूलों से सजाया जाता है और छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है।
यहां लगभग तीन एकड़ में परिसर में मां भगवती के भव्य मंदिर के अलावा भगवान शिव, हनुमान जी, नाग मंदिर एवं 6 धर्मशालाऐं भी है।
 

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