बिहार में नहीं रुक रहा घोटालों का सिलसिला, शौचालय के बाद अब आया जाम बस्टर घोटाला  

बिहार में नहीं रुक रहा घोटालों का सिलसिला, शौचालय के बाद अब आया जाम बस्टर घोटाला  

By: Sudakar Singh
November 14, 09:11
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Patna : राजधानी की प्रमुख मार्ग पर नो पार्किग के नाम पर वाहन टो-चेन करने वाली जाम बस्टर एजेंसी की कार्य प्रणाली सवालों के घेरे में आ चुकी है। आरोप है कि इस एजेंसी को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर में खेल कर दिया गया। बगैर कैबिनेट की मंजूरी के एजेंसी जहां एक बार में 11 माह का अनुबंध होना चाहिए, उसे तीन साल का अनुबंध मिल गया। सूत्रों की मानें तो निजी एजेंसी सरकारी खजाने में महज 50 से 60 लाख रुपए जमा की, जबकि एजेंसी के खाते में करीब आठ करोड़ रुपये गए।


एजेंसी अपनी नीति पर काम करती गई और खुलेआम राजस्व की लूट करने वाली फायदा नुकसान की समीक्षा तक नहीं की गई। एजेंसी आठ से दस गुना फायदा कमा ली। जहां एजेंसी को करीब आठ करोड़ फायदा हुआ वहीं सरकार के खाते में एक करोड़ भी नहीं गया। फिलहाल आइजी नैय्यर हसनैन खान के निर्देश पर गठित टीम पूरे मामले की जांच में जुटी है। इस मामले जाम बस्टर एजेंसी की छुट्टी भी हो सकती है और कई लोग फंस भी सकते है। 


एक पुलिस अधिकारी की मानें तो नो पार्किंग जोन बनाना और वहां से वाहनों का टो-चेन करने शहर को जाम मुक्त रखने की योजना बनी। ओपन टेंडर भी हुआ, लेकिन टेंडर के दौरान जनहित का ख्याल नहीं रखा गया। यहां तक की कैबिनेट की मंजूरी भी नहीं ली गई। जिस जाम बस्टर एजेंसी को अनुबंध किया गया उसने जाम बस्टर पर दो से तीन वाहन का टो-चेन की बात कहकर अपना फायदा नुकसान गिना दिया, पर इसमें खेल हुआ। 


एक जाम बस्टर से आधा दर्जन से अधिक बाइक टो-चेन किया गया। यहां तक की वाहन जाम बस्टर का फिटेनेस भी नहीं चेक किया गया। 15 साल पार कर चुके वाहन से टो-चेन का काम चलता रहा। गलत पाकिर्ंग करने के नाम पर 750 रूपये का चलान काटा जाता हैं। इसमें महज 100 रूपये सरकारी खजाने में जाता हैं और शेष राशि निजी एजेंसी के खाते में पहुंच रहा। समीक्षा के बाद एजेंसी की मान्यता रद हो सकती है। कानूनी कार्रवाई भी संभव है।
 

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