पटना पुस्तक मेले में लोगों को भा रहा गांधी जी का चरखा, लोग खूब ले रहे सेल्फी   

पटना पुस्तक मेले में लोगों को भा रहा गांधी जी का चरखा, लोग खूब ले रहे सेल्फी   

By: Sudakar Singh
December 06, 09:12
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Patna : पटना के ज्ञान भवन में पुस्तक मेला लगने के बाद से ही पुस्तक प्रेमियों की भीड़ उमड़ पड़ी है। पुस्तक प्रेमियों के इस भीड़ को देखने के लिए हम भी पहुंच गए पुस्तक मेला। पहली बार ये मेला गांधी मैदान की जगह ज्ञान भवन में लगा है। ज्ञान भवन में एंटर करते ही आपको सबसे पहले एक सेल्फी जोन दिखेगा, जहां लोग अलग-अलग एंगल से सेल्फी लेते नजर आएंगे। अब आप सोच रहे होंगे कि ये पुस्तक मेला है, या कोई पार्क। आपका सोचना सही है मगर ये पुस्तक मेला ही है। 


दरअसर ज्ञान भवन में प्रवेश करते ही सबसे पहले आपको बापू का एक बड़ा सा चरखा दिखेगा और लोग इसके आस-पास सेल्फी लेते नजह आएंगे। मेले में आने वाला हर व्यक्ति सबसे पहले यहां सेल्फी लेता है। खासकर के युवा वर्ग, इसके बाद ही अपनी मनपसंद किताबें खरीदता है। हमने भी इस परंपरा को जारी रखते हुए एक सेल्फी ली और बढ़ चले किताबों की दुनिया की तरफ।


मेले में छोटे बच्चे से लेकर बुजुर्गों  तक की पसंद की किताबें मौजूद है। इतिहास से वर्तमान होते हुए भविष्य तक को कागजों में समेटे कई किताबें आपको यहां मिल जाएंगी। इसके अलावा धर्म-अध्यात्म की किताबें भी यहां मौजूद है। हमारी नजर एक 23 वर्षीय युवा पर पड़ी जो एक किताब के पन्ने पलट रहा था। आखिर वह कौन सी किताब में खोया है ये जानने के लिए हम उसके पास पहुंचे। उसके हाथ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आधारित एक किताब ‘चाय बेचने वाले से लेकर प्रधानमंत्री तक का सफर’ थी, जिसे लव कुमार ने लिखी है। 
मीठापुर बस स्टेंड से पुस्तक मेला आए प्रकाश ने बताया, “मैंने जैसे ही मेले में प्रवेश किया, मेरी नजर सबसे पहले प्रधानमंत्री मोदी पर लिखी इस किताब पर पड़ी। मैं ये तो जानता हूं कि देश के प्रधानमंत्री पहले चाय बेचा करते थे, मगर ये नहीं जानता कि एक चाय बेचने वाला व्यक्ति प्रधानमंत्री कैसे बन गया। इस किताब में शायद मेरे इस सवाल का जवाब मिल जाए। यही सोचकर ये किताब खरीद रहा हूं। इस किताब को पढने के लिए मैं काफी उत्साहित हूं।


वहीं कुछ दूरी पर जमशेदपुर से आए 45 वर्षीय राकेश भी अपने हाथ में एक किताब लिए खड़े थे। हमने उनसे भी जानना चाहा कि वह किस तरह की किताब खरीद रहे हैं। हम उनके पास भी गए। उनके हाथ में “आत्म-विकास की उपदेशक, शिक्षापद एवं प्रेरणाप्रद; 65 कथाएं” किताब थी। किताब के बारे में उन्होंने बताया कि ऐसी किताबें पहले अंग्रेजी में ही आती थी। मगर अब हिंदी में भी आने लगी है। उन्होंने बताया कि वह हर साल पटना पुस्तक मेला आते हैं और कोई ना कोई किताब खरीदते हैं। इस बार भी वह किताबें खरीदे बगैर नहीं जाने वाले। 


जब हमने उनसे पूछा कि आज सोशल मीडिया का समय है। लोग फेसबुक, ट्वीटर आदि का इस्तेमाल करते हैं। एक वर्चुअल दुनिया में जी रहे हैं। ऐसे में किताबों का कितना महत्व है। खास करके युवाओं के लिए। उन्होंने इस बात को ही खारिज कर दिया कि सोशल मीडिया के जमाने में लोग बुक्स नहीं पढ़ते। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया से जुड़े लोग बुक्स पढ़ते हैं और इसके बाद ही सोशल मीडिया पर अपना स्टेटस पोस्ट करते हैं। उन्होंने कहा कि मैं भी इस किताब को पढ़कर इसके बारे में सोशल मीडिया पर पोस्ट करूंगा। ऐसा नहीं है कि सोशल मीडिया के कारण लोगों में बुक्स पढ़ने को लेकर रुचि कम हुई है।
 

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