किसानों के साथ बिहार में खुलेआम मनमानी, ऋण देने में बैंक कर रहे टालमटोल

PATNA : राज्य सरकार की हिदायतों के बावजूद सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक किसानों को ऋण देने में टालमटोल कर रहे हैं। विभिन्न कागजात में कमी बताकर ऋण देने से इनकार किया जा रहा है। राज्य स्तरीय बैँकर्स समिति एवं राज्य सरकार के सभी प्रयास बेकार साबित हो रहे है। यही कारण है कि बैंकों द्वारा कृषि क्षेत्र में ऋण देने में 15.54 प्रतिशत की गिरावट आई है। यह गिरावट वित्तीय वर्ष 2018-19 की तीसरी तिमाही में दर्ज की गयी है। यह स्थिति कृषि प्रधान राज्य बिहार के लिए चिंताजनक है।

वित्तीय वर्ष 2018-19 में कृषि क्षेत्र में 60 हजार करोड़ ऋण वितरित करने का लक्ष्य है। इसके विरुद्ध दिसंबर, 2018 तक 28 हजार 304 करोड़ ऋण बैंकों द्वारा वितरित किया गया है। यह लक्ष्य का मात्र 47.17 प्रतिशत है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2017-18 में दिसंबर, 2017 तक कृषि क्षेत्र में बैंकों ने 62.71 फीसदी कर्ज बांटे थे। जरूरी कागजात देने के बावजूद यदि बैंक ऋण देने से मना करें तो किसान इसकी शिकायत कर सकते हैं।

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किसानों के लिए बहु उपयोगी किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) जारी करने में भी बैंक सुस्त हैं। किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार केसीसी नहीं मिल रहा है। दस लाख किसानों को इस वर्ष केसीसी उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इसके विरुद्ध जून तक 11.54 फीसदी, सितंबर तक 13.95 फीसदी एवं दिसंबर तक 17.77 फीसदी ही केसीसी दिये गए।