पटना में बनेगा इंटरनेशनल साइंस सिटी, सीएम नीतीश कुमार ने किया शिलान्यास, 320 करोड़ होंगे खर्च

मुख्यमंत्री ने राजेंद्र नगर स्टेडियम के बगल में बनने वाले साइंस सिटी का भी शिलान्यास किया। साथ ही पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि निर्माण कार्य जल्द शुरू करा दें। उन्होंने कहा, पूर्वराष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर बनने वाली साइंस सिटी कोलकाता की साइंस सिटी से भी बेहतर होगी। 20 एकड़ में बनने वाली इस साइंस सिटी का निर्माण लागत अभी 320.71 करोड़ रखा गया है।

इंटरनेशनल साइंस सिटी, कलाम-आर्यभट्ट का दिखेगा विजन : पटना में डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर की साइंस सिटी का निर्माण किया जा रहा है। प्रेमचंद रंगशाला की बगल में बन रही इस साइंस सिटी का नाम देश के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के नाम पर रखा गया है। ताजा अपडेट के अनुसार 397 करोड़ की लागत से बनने वाली सांइस सिटी 2020 तक बनकर तैयार हो जाएगा अंतरराष्ट्रीय साइंस सिटी। इस प्रोजेक्ट को बिहार सरकार ने डॉ. कलाम का नाम दिया है। इस साइंस सिटी में पहली बार एक साथ आर्यभट्ट से लेकर कलाम तक का विजन दिखेगा। बिहार सरकार ने 397 करोड़ रूपये की लागत से बनने वाले इस प्रोजेक्त को वर्ष 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। उल्लेखनीय है कि प्रोजेक्ट स्थल की बाउंड्री पूरी हो चुकी है। भवन निर्माण के लिए टेंडर निकालने की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है। जैसे ही कंपनी का नाम फाइनल होते ही भवन निर्माण शुरु हो जाएगा। 20.48 एकड़ में बन रहे इस साइंस सिटी में पांच दीर्घाएं अलग-अलग थीम पर आधारित होगी।

यह साइंस सिटी पुरी तरह से अत्याधुनिक और डिजिटल तकनीक से संचालित होगी। इस अंतरराष्ट्रीय साइंस सिटी के प्रोजेक्त को पूरा करने के लिए तीन विदेशी एजेंसिय़ां दिन रात कार्य कर रही है।मिली जानकारी के अनुसार भारतीय इतिहास में हुए तमाम बड़े वैज्ञानिक की तकनीकों और खोजों को साइंस सिटी में जगह दी जाएगी । यह अंतरराष्ट्रीय स्तर की होगी : अतुल सिन्हा ने बताया यह साइंस सिटी अंतरराष्ट्रीय स्तर की होगी। अभी अहमदाबाद, चंडीगढ़ आदि शहरों में साइंस सिटी है, लेकिन यह इन सबसे बिल्कुल अलग होगी। 400 करोड़ की लागत से इसे बनाने का अनुमान है। रोबोटिक्सपर भी होगा काम : इसमें स्कूल कॉलेज के छात्र-छात्राओं को साइंस से जुड़े सवालों का जवाब तलाशने में मदद मिलेगी। फिजिक्स की किताबों में पढ़े सिद्धांतों को छात्र यहां प्रायोगिक रूप में देख पाएंगे। यहां रोबोटिक्स पर भी काफी काम होगा। छात्र यहां आकर साइंस से जुड़े प्रयोग भी कर सकेंगे।