सवर्ण आरक्षण पर जमकर हो रही राजनीति, महागठबंधन के दो बड़े नेता आए आमने-सामने 

सवर्ण आरक्षण पर जमकर हो रही राजनीति, महागठबंधन के दो बड़े नेता आए आमने-सामने 

By: Sudakar Singh
September 14, 07:20
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Live Bihar Desk : एससी एसटी एक्ट में संशोधन के बाद जहां एक तरफ देशभर में सवर्णों का गुस्सा फूटा है, वहीं दूसरी तरफ गरीब सवर्णों को आरक्षण देने का मुद्दा भी जोर पकड़ रहा है। बिहार में इस मुद्दे को लेकर खूब राजनीति हो रही है। नेताओं की बयान बाजी जारी है। इस मुद्दे पर महागठबंधन के दो बड़े नेता एक दूसरे के खिलाफ बयान दे रहे हैं। जीतन राम मांझी और उदय नारायण चौधरी आमने सामने आ गए हैं।

हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि हम अपनी पार्टी के स्थापना काल से ही गरीब स्वर्णों के आरक्षण के हिमायती रहे हैं। उन्होंने इसके लिए केंद्र सरकार से जातिगत जनगणना के आकड़े जारी करने की मांग भी की थी। उस आंकड़ें के आधार पर संविधान संसोधन करते हुए लोहिया के विचार के अुनसार हरेक समाज के आबादी के अनुसार भागीदारी देने की व्यवस्था करने की मांग की। 

वहीं दूसरी तरफ गरीब सवर्णों को आरक्षण देने के मांझी के बयान का पुर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने विरोध किया है। उन्होंने कहा कि 15 फीसदी आरक्षण मांगने वाले को बहुजन समाज सबक सिखाएगा। उन्होंने कहा कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने संविधान में सामाजिक और शैक्षणिक आधार पर कमजोर लोगों को लिए आरक्षण की व्यवस्था की है न कि आर्थिक आधार पर।

पूर्व उप मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी गरीब सवर्णों को आरक्षण देने के मुद्दे पर अपना स्टैंड साफ कर दिया है। तेजस्वी यादव ने कहा कि जातिगत जनगणना के नतीजे सार्वजनिक करने के बाद ही सवर्णों के आरक्षण की बात की जानी चाहिए। जातीय जनगणना के आंकड़े जब सामने आएंगे तभी पता चलेगा कि कौन गरीब है और तब हम सर्वणों के आरक्षण की बात करेंगे।  

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