प्यार में पागल हो गए थे सांसद पप्पू यादव, रंजीता रंजन के लिए की थी जान देने की कोशिश

PATNA : अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले बिहार के बाहुबली नेता पप्पू यादव पर दो नवंबर 1990 को एक पुलिसकर्मी की मूंछ उखाड़ने के एक मामले में जमानत मिली है, सुर्खियों में रहने वाले पप्पू यादव की लव स्टोरी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है।

एक मर्डर के मामले में जब पप्पू यादव जेल में सजा काट रहे थे, तभी उन्हें रंजीता से प्यार हो गया था। उन्हें अपनी प्रेमिका (अब पत्नी) रंजीता को मनाने के लिए काफी पापड़ बेलने पड़े। पप्पू को अपने प्यार को पाने के लिए पटना, दिल्ली और चंडीगढ़ के कई चक्कर लगाने पड़े। आज पप्पू जन अधिकार पार्टी के सांसद हैं तो उनकी पत्नी रंजीता रंजन कांग्रेस की सांसद हैं। कई ऐसे मोड़ आए जब लगा सब कुछ बिखर गया, लेकिन ये पप्पू की जिद ही थी कि उन्होंने शादी का प्रपोजल रंजीता के सामने रखा। वे अपनी प्रेमिका की फोटो देखकर कुछ इस कदर फिदा हो गए कि फिर वे सब कुछ भूलकर उसकी महज एक झलक पाने के लिए हर दिन टेनिस कोर्ट पहुंच जाते थे।

pappu yadav

बात साल 1991 की है। तब पप्पू यादव पटना के बांकीपुर जेल में बंद थे। पप्पू अक्सर जेल सुपरिटेडेंट के रेसिडेट से लगे मैदान में लड़कों को खेलते देखा करते थे। इन्हीं लड़कों में रंजीता के छोटे भाई विक्की भी थे। इन लड़कों से मिलने-मिलाने के सिलसिले में विक्की से पप्पू की नजदीकियां बढ़ गई। लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया जब पप्पू यादव ने विक्की के फैमिली एलबम में रंजीता की टेनिस खेलती हुई। पप्पू फोटो देखकर रंजीता पर फिदा हो गए। पप्पू जेल से छूटने के बाद रंजीता से मिलने के लिए अक्सर उस टेनिस क्लब में पहुंच जाते थे, जहां वो खेला करती थीं।

रंजीता को ये सब पसंद नहीं था। उन्होंने पप्पू यादव को कई बार आने के लिए मना किया। मिलने से रोका और फिर भी नहीं मानने पर कड़े शब्दों में इसका विरोध भी किया। एक बार तो रंजीता ने यहां तक कह दिया कि वे सिख हैं और पप्पू हिंदू। उनके परिवार वाले ऐसा होने नहीं देंगे। रंजीता रंजन के माता पिता ग्रंथी थे और इस विवाह के खिलाफ थे। लेकिन पप्पू यादव के आनंद मार्गी पिता चंद्र नारायण प्रसाद और माता शांति प्रिया की ओर से कोई समस्या नहीं थी। जब रंजीता के परिजनों की ओर से शादी की मंजूरी नहीं मिली तो पप्पू यादव, रंजीता के बहन-बहनोई को मनाने चंडीगढ़ पहुंच गए।

लेकिन यहां भी पप्पू की नहीं चली। दिल्ली में रंजीता के एक और बहनोई ने भी पप्पू यादव की बात नहीं माने। पप्पू यादव इससे निराश हो गए। इसी बीच उन्हें पता चला कि कांग्रेस नेता एसएस अहलूवालिया उनकी मदद कर सकते हैं। पप्पू यादव उनसे मिलने दिल्ली जा पहुंचे और फिर उनसे मदद की गुहार लगाई। पप्पू यादव की शादी पहले पूर्णिया के गुरुद्वारे में होनी तय हुई। लेकिन फिर तय हुआ कि शादी आनंद मार्ग की पद्धति से होगी। इस बीच रंजीता और उनके परिजनों को लेकर आ रहा चार्टर्ड विमान रास्ते में ही भटक गया और देरी के कारण हंगामा मच गया।

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लेकिन बाद में पता चला कि विमान का पायलट रास्ता भटक गया था। खैर विमान पहुंचा और लोगों ने राहत की सांस ली। शादी को लेकर पूर्णिया की सड़कों को पूरी तरह सजा दिया गया था। शहर के सारे होटल और गेस्ट हाउस बुक थे। आम और खास सबके लिए व्यवस्था की गई थी। इस शादी में चौधरी देवीलाल, लालू प्रसाद, डीपी यादव और राज बब्बर भी शामिल हुए और फरवरी 1994 में पप्पू यादव और रंजीता की शादी हो गई।

पप्पू यादव कहते हैं कि वे और रंजीता सर्वश्रेष्ठ दोस्त रहे हैं। वे कहते हैं, “रंजीत जी खुद आध्यात्मिक हैं। बहुत अच्छा बोलती हैं। व्यक्तित्व बहुत अच्छा है। ईमानदारी से जीतीं हैं। लाग-लपेट में नहीं रहती हैं। बच्चों के लिए बेस्ट मां हैं’ पप्पू यादव मधेपुरा से राजद के टिकट पर और उनकी पत्नी रंजीता रंजन सुपौल से कांग्रेस के टिकट पर इस दफा चुनाव जीती हैं। यह बिहार का पहला जोड़ा है, जो एक साथ संसद भवन में प्रवेश पाया है।

पप्पू यादव ने अपनी किताब ‘द्रोहकाल का पथिक’ में विस्तार से अपनी लव स्टोरी का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि कैसे हताश-परेशान होकर उन्होंने एक बार नींद की ढेरों गोलियां खा ली थीं। हालत बिगड़ने पर उन्हें इलाज के लिए पीएमसीएच में एडमिट कराया गया था। इसके बाद रंजीता का व्यवहार थोड़ा सामान्य हुआ और फिर बात आगे बढ़ी थी।

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