भारत को नेपाल का झटका, रेल परिचालन में चीनी मानक का प्रयोग करेगा नेपाल

PATNA : नेपाल अपने देश में रेल परिचालन के लिए भारतीय गेज मानकों का नहीं बल्कि चीनी गेज मानकों का उपयोग करेगा। इस बारे में परिवहन मंत्री निक्केई ने कहा कि हमने फैसला किया है कि चीनी मानकों का पालन किया जाएगा। जानकारों की माने तो भारत के लिए यह खबर झटका देने वाली है।

ताजा अपडेट के अनुसार नेपाल अपने रेलवे के लिए चीनी रेलवे का स्टैण्डर्ड गेज इस्तेमाल करेगा। भारतीय मानक का उपयोग मात्र 5 रेल रुट के लिए किया जाएगा जो भारत सीमा के साथ लगे हुए हैं। उधर दूसरी ओर कहा जा रहा है कि अगले छह महीने में चीन और नेपाल के बीच रेल लिंक बनकर तैयार हो जाएगा। एक तरह से कहा जाए तो अगले छह महीने में नेपाल समुद्री मार्ग से व्यापार और सड़क मार्ग से आयात के लिए भारत पर निर्भर नहीं रहेगा।

बताते चले कि पिछले साल चीन और नेपाल के बीच एक रेल नेटवर्क के निर्माण सहित 14 समझौतों हुए थे। यह कथित रेल संपर्क तिब्बत और नेपाल को जोड़ेगा, जो नेपाल के लिए कहीं अधिक व्यापार और परिवहन वस्तुओं के पहुंचने का मार्ग प्रशस्त करेगा। हांगकांग आधारित साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट की खबर के मुताबिक दोनों देशों ने कल 2. 4 अरब डॉलर के आठ समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इसमें जलविद्युत परियोजनाएं , सीमेंट फैक्टरी और फल उत्पादन शामिल हैं। ओली के साथ वार्ता के दौरान शी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वह नेपाल – चीन सीमा सड़क संपर्क को साकार होते देखने को इच्छुक है। पोस्ट ने शी के हवाले से कहा है, ‘‘शिगास्ते (तिब्बत) से ट्रेन काठमांडो पहुंचेगी।’’

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गौरतलब है कि नेपाल में बुनियादी सुविधाओं के विकास में चीन पिछले कई वर्षो से निवेश कर रहा है। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने राष्ट्रपति शी के हवाले से बताया है कि ओबीओआर प्रोजेक्ट के तहत चीन नेपाल में बुनियादी ढांचे के विकास, भूकंप से हुए नुकसान की भरपाई करने, व्यापार और निवेश के लिए तैयार है। शी ने यह भी आश्वासन दिया है कि वह नेपाल की राष्ट्र के रूप में संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को भी कायम रखेगा। शी ने ‘वन चाइना’ पॉलिसी का सम्मान करने और नेपाल में चीन विरोधी गतिविधियों को पनपने न देने के लिए भी प्रधानमंत्री ओली से आभार जताया।