गया में इस महीने अस्पताल में भर्ती 22 में से 6 बच्चों की मौ’त, नहीं पता चला मौ’त का कारण

PATNA: बिहार में AES बुखार से होने वाली बच्चों की मौ’त का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। Gaya के मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इस महीने 22 बच्चों को भर्ती कराया गया था। जिनमें अब तक 6 बच्चों की मौ’त हो चुकी है लेकिन मौ’त इसी बुखार की वजह से हुई है या अन्य कारणों से प्रशासन इसका अभी तक पता लगा नहीं पाया है।

मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ वीके प्रसाद का इस मामले को लेकर कहना है कि यह AES से जुड़ा मामला हो सकता है लेकिन इसकी पुष्टि होना अभी बाकी है। मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार है, इसके बाद पता लगाया जाएगा। ये 2 जुलाई से शुरू हुआ है। अब तक 22 मरीजों को भर्ती किया गया है। यह बताया जा रहा है कि वे एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से पी’ड़ित हो सकते हैं, लेकिन अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है, रिपोर्ट की प्रतीक्षा की जा रही है। मरीजों का इलाज किया जा रहा है। 6 बच्चों की मौ’त हो गई है।

बता दें कि बिहार में AES मासूम बच्चों पर काल बनाकर आया। जिसके चलते राज्य में 150 से अधिक बच्चों की मौ’त हो गई। चमकी बुखार को लेकर राज्य में विपक्षी दलों द्वारा जमकर राजनीति भी की जा रही है। बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान आरजेडी कार्यकर्ताओं ने नीतीश सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। वहीँ स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय और सीएम नीतीश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

सर्वोच्च न्यायालय ने भी लगाई फटकार:

वहीँ देश की सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस मामले को लेकर बिहार सरकार के साथ केंद्र सरकार को भी फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार बिहार सरकार ने अदालत में राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर हलफनामा दायर किया था। हलफनामा राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं की खराब स्थिति को दर्शाता है। बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 12,206 डॉक्टरों की अधिकृत संख्या के खिलाफ सरकार द्वारा संचालित स्वास्थ्य केंद्रों में केवल 5,205 डॉक्टर हैं।