आम्रपाली ग्रुप : ‘मेरा घर मेरा हक’ का नारा देने वाले अनिल शर्मा का सितारा ऐसे डूबा गर्दिश में

PATNA : करीब 40,000 लोग अपनी ज़िन्दगी की जमा पूंजी लगाकर आम्रपाली ग्रुप से घर मिलने का इंतज़ार करते रहे और कंपनी के सीएमडी अनिल शर्मा और दो निदेशक अजय कुमार और शिवप्रिय पैसे इधर उधर कर के अपनी अपनी तिजोरियां भरते रहे। अब आखिरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया है लेकिन जिस तरफ 16 सालों में आम्रपाली ग्रुप की नींव रख लोगों को अपने घर का सपना दिखने वाले अनिल शर्मा का सितारा बुलंदी से गर्दिश में पहुंचा वो दिलचस्प है। 

बिहार की राजधानी पटना से करीब 70 किलोमीटर दूसर छोटे से पंडारक गाँव के रहने वाले अनिल शर्मा एक इंजिनियर से दिल्ली-एनसीआर के सबसे बड़े बिल्डर बने और 16 सालों में उन्होंने आम्रपाली को एक ऐसा ब्रांड बना दिया जिसका मतलब होता था उम्मीद, जो लोगों के अपने घर का सपना पूरा करता था। आईआईटी खरगपुर से एमटेक और फिर एनटीपीसी और एनपीसीसी में नौकरी करने वाले अनिल शर्मा ने 2003 में दिल्ली -एनसीआर में आम्रपाली ग्रुप की नींव डाली और पहला प्रोजेक्ट था आम्रपाली एक्जॉटिका। इस प्रोजेक्ट्स के तहत 140 फ्लैट्स तैयर हुए और नारा दिया गया मेरा घर मेरा हक। ये प्रोजेक्ट पूरा होते ही आम्रपाली एक बड़ा ब्रांड बन गया और एक के बाद एक कई प्रोजेक्ट देश के कई शहरों में शुरू हो गए।

नोयडा, ग्रेटर नोयडा, गाज़ियाबाद, जयपुर जैसे शहरों में  फ्लैट्स, कॉमर्शियल हब, आईटी हब जैसे प्रोजेक्ट्स ने आम्रपाली को लोगों का चहेता ब्रांड बना दिया। दिल्ली-एनसीआर के सारे बिल्डर आम्रपाली के आगे फीके पड़ने लगे। बड़े बड़े नाम आम्रपाली के साथ जुड़ने लगे जिसमे क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी और सुरेश रैना शामिल थे। जैसे जैसे कंपनी का कद बढ़ा अनिल शर्मा का भी कद बढ़ने लगा। रियल एस्टेट कंपनियों का शीर्ष संगठन रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई) ने उन्हें अपना अध्यक्ष बनाया और देश विदेश से करीव 70 अवार्ड्स उन्होंने हासिल किये। एक वक़्त 25 शहरों में एक साथ 50 प्रोजेक्ट्स पर कंपनी काम कर रही थी। कंपनी का  कारोबार एनसीआर की सरहदों को लाँघ कर  भिलाई, लखनऊ, बरैली, वृन्दावन, मुजफ्फरपुर, जयपुर, रायपुर, कोच्चि और इंदौर तक में फैला रहा था। रियल एस्टेट के अलावा एफएमसीजी, हॉस्पिटैलिटी, और इंटरटेनमेंट की दुनिया में भी कंपनी ने कदम रख दिया। दो फिल्मों का भी निर्माण किया।

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अनिल शर्मा की राजनितिक महत्वकांक्षा भी जाग गई। 2014  में जेडीयू के टिकट पर चुनाव भी लड़ें लेकिन हार का सामना करना पड़ा। 2015 तक कंपनी का सितारा बुलंदी पर था। फिर उसका बुरा दौर शुरू हुआ। कंपनी के चेक बाउंस होने लगे। एक प्रोजेक्ट का पैसा दुसरे प्रोजेक्ट्स में लगा दिया। जिस कारण कोई भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो पा रहा था। घर मिलने में  देर हो रहे थे तो लोगों का सबे जवाब देने लगा। घर खरीदने वालों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। लोगों जवाब मांगने लगे कि उनका पैसा कहाँ गया? बढ़ते विवाद के बाद धोनी ने कंपनी से अपना नाम अलग कर लिया। इधर लोग अपने घर का इंतज़ार कर रहे थे उधर अनिल शर्मा, शिवप्रिय और अजय कुमार अपनी तिजोरियां भर रहे थे। इन तीनों ने करोड़ों की लागत से अपनी ऐसी ऐसी कोठियां खड़ी की  जिसका आम आदमी  सिर्फ सपना देख सकता है। अनिल शर्मा की साउथ दिल्ली में एक बंगले की कीमत का अंदाजा 100 करोड़ लगाया गया। नोयडा में कई पेंट हाउस और कोठिया है इन तीनों की। शिवप्रिय की बीवी जैगुआर से चलती हैं। लेकिन अब इनका साम्राज्य डूब चूका है। सुप्रीम कोर्ट ने तीनों की संपत्तियां जब्त करने का आदेश दे दिया है।