बिहार में लालू राबड़ी युग का अंत करने वाले अरुण जेटली पंचतत्व में हुए विलीन

PATNA : आज अरुण जेटली का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ कर दिया गया। उनके बेटे रोहन ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस मौके पर कई बड़े नेता  उपस्थित  रहे और उनको श्रद्धांजलि थी। ऐसा माना जाता है कि बिहार में एक समय जो लालू और राबड़ी का जलवा चलता था, उसका अंत नीतीश ने किया। लेकिन बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार को स्थापित करने वालों में अरुण जेटली का योगदान अहम माना जाता है।

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यद्यपि अरुण जेटली बिहार के नहीं थे, लेकिन बीते 20 वर्षों में उनका राज्य की राजनीति में अहम स्थान रहा। आपको बता दें कि 2000 में जब नीतीश सात दिनों के लिए मुख्यमंत्री बने थे, उस समय विधानसभा में सदस्य संख्या के लिहाज से भाजपा बड़ी पार्टी थी। फिर भी नीतीश मुख्यमंत्री बने तो उसमें अरुण जेटली का बड़ा योगदान था। उस समय अरुण जेटली भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव थे और बिहार में भाजपा के प्रभारी थे। अरुण जेटली ने नीतीश कुमार को बिहार का मुख्यमंत्री बनाने में अहम योगदान निभाया। उन्होंने भाजपा आलाकमान को सलाह दी थी कि बिहार से लालू यादव के राज से लड़ने के लिए नीतीश कुमार को चेहरा बनाया जाय। क्योंकि कई जदयू नेता भी नीतीश कुमार के खिलाफ थे।

2013 में भाजपा-जदयू की दोस्ती खत्म हो गई। 2014 के चुनाव में दोनों अलग-अलग लड़े। भाजपा गठबंधन को 40 में से 31 सीटें मिली। जदयू दो पर सिमट आया। इसके बावजूद अरुण जेटली और नीतीश की दोस्ती खत्म नहीं हुई। नीतीश कुमार को दोबारा भाजपा के साथ लाने में अरुण जेटली की भूमिका अहम थी।