मां सरस्वती जी के जन्मदिवस के साथ ही शुरू हो जाती है होलिका तैयारी, जाने पूजन करने की विधि

PATNA : बसंत पंचमी का दिन माँ सरस्वती जी की वंदना करने के लिए विशेष दिन माना जाता है। इस दिन ज्ञान की देवी माँ सरस्वती जी की पूजा घर-घर में की जाती है। विद्यालयों में भी इस दिन विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है। सरस्वती जी की पूजा-अर्चना के साथ ही इस दिन से होली की भी तैयारियां शुरू कर दी जाती हैं। उत्तर भारत में बसंत पंचमी से फाग सुनना प्रारंभ हो जाता है, जो फाल्गुन पूर्णिमा तक चलता है। इसी के साथ ही होलिका की लकड़ी एकत्र करना प्रारंभ कर दिया जाता है।

इसी दिन मथुरा, वृंदावन ब्रज क्षेत्र में प्रत्येक मंदिर में होली की शुरआत की जाती है। मथुरा में बसंत पंचमी के दिन से जिस जगह होलिका दहन होता है वहां खूंटा गाड़ने की परंपरा का भी निर्वहन किया जाता है। ब्रज में बसंत पंचमी से होली की शुरुआत मानी जाती है। इस दिन से होली के पर्व के लिए विशेष पूजा शुरू की जाती है। इस दिन भगवान विष्णु का भी पूजन किया जाता है। प्रातः काल तैलाभ्यंग स्नान करके पीत वस्त्र धारण कर, विष्णु भगवान का विधिपूर्वक पूजन करना चाहिए तदुपरान्त पितृतर्पण तथा ब्राह्मण भोजन कराना चाहिए। इस दिन से बब्रज क्षेत्र में घर-घर में रंगोली रखने का महत्त्व भी है। बसंत पंचमी से लेकर होली तक घर-घर में सुन्दर-सुन्दर रंगोली रखी जाती है।

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बसंत पंचमी पर मनाये जाने वाले वसंतोत्सव पर पीला वस्त्र अवश्य पहनते हैं। बसंत पंचमी के दिन मिट्टी आम का बौर या गेंहूं और जौ की बाली लगा कर बसंता घर लाना चाहिए। विद्या आरंभ के लिए यह दिन अत्यंत ही श्रेष्ठ माना जाता है अत: पाठशाला जाने वाले बच्चों को इस दिन की पूजन अवश्य करना चाहिए। बसंत पूजा के दिन भगवान को गुलाल लगायें। पीले चावल बनायें, कलश स्थापित करें गंध पुष्प धूप आदि से सरस्वती का उपचार पूजन करें।