FLASHBACK : एक रुपया खर्च किए बिना चुनाव जीतकर बलिया से MP बने थे बेगूसराय के रामजीवन सिंह

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PATNA : परिवर्तन समय की नियती है। समय के साथ-साथ बहुत कुछ बदल जाता है। उस तरह आजादी के बाद से चुनावी राजनीति काफी बदल गई है। कभी समाजिक लोग समाज में परिवर्तन लाने के लिए चुनावी मैदान में उतरते थे। गरीब होने के बाद भी जनता से आर्थिक सहयोग लेकर चुनाव लड़ते थे और जीतते हारते थे। इस चुनावी सीजन में लाइव बिहार आपको एक ऐसी कहानी बताने जा रहा है जिस पर आप संभवत: विश्वास ना करें लेकिन यह सच है। बिना एक रुपए खर्च किए बिना बिहार के एक नेता एमपी बन गऐ थे।

बिना खर्च किए ही जीत गए थे 1977 का लोकसभा चुनाव : आज के समय में कोई यह कहे कि वह बिना एक रुपये खर्च किए चुनाव जीत गया है तो यह सबसे बड़ा मजाक होगा। लेकिन यह सत्य है। बेगूसराय जिले के कद्दावर समाजवादी नेता रहे रामजीवन सिंह बलिया (बेगूसराय) सीट से 1977 का लोकसभा चुनाव बिना खर्च के ही जीत गए थे। चुनाव की घोषणा के वक्त वे जे-ल में थे और मतदान से दस दिन पहले ही जे-ल से बाहर आए थे। इस दस दिन के दौरान उन्होंने साइकिल व जीप से पूरे क्षेत्र का एक बार दौरा किया।

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वे पुराने दिनों को याद करते हुए कहते हैं- पहले की राजनीति जमीन से जुड़ी होती थी। नेता और कार्यकर्ताओं में सीधा संवाद होता था। जनसंपर्क व माइकिंग ही सूचना पहुंचाने का माध्यम था। राजनीतिक आधार आदर्श व नैतिकता होती थी। अब सत्ता अभिमुख है। बताया कि पहले के नेता कथनी और करनी में समानता रखने की कोशिश करते थे, लेकिन अब ठीक विपरीत है।

रामजीवन सिंह 1949 से सक्रिय राजनीति से जुड़े रहे हैं। पहली बार उन्होंने 1962 में विधानसभा का चुनाव लड़ा था। फिर वे 1967, 69 व 72 में विधानसभा का चुनाव जीते। उन्होंने बताया कि इन तीनों चुनाव मिलाकर 20 हजार रुपये से अधिक खर्च नहीं हुआ था। बलिया लोकसभा क्षेत्र से 1977 व 1999 में चुनाव जीतकर सांसद बने थे। 2004 में कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार शत्रुघ्न प्रसाद सिंह व रामजीवन सिंह दोनों हजारों मतों से चुनाव हार गए। इस चुनाव में सूरजभान को जीत मिली थी।

रामजीवन ने कहा कि पहले की राजनीति आचरण, व्यवहार व नैतिकता पर आधारित होती थी। अब जातीय समीकरण आधारित होती हैं। सभी पार्टियों में लोकतांत्रिक ढांचा समाप्त होते जा रहा है। यह चिंता का विषय है। इसका असर अब संवैधानिक संस्थानों पर भी साफ दिखने लगा है।

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