बेगूसराय के रहने वाले आईएएस रवींद्र कुमार ने दूसरी बार फतह किया माउंट एवरेस्ट, चढ़ाया गंगाजल

रविंद्र कुमार प्रथम और एकमात्र आईएएस अफसर हैं, जिन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर लगातार दो बार चढ़ने पर में सफलता पायी है। वे 2013 में पहली बार माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक चढ़ायी की। मई 2019 में लगातार दूसरी बार एवरेस्ट पर चढ़कर इतिहास लिखने वाले पहले आईएएस बन गये हैं। इतना ही नहीं उन्होंने एवरेस्ट पर गंगाजल भी चढ़ाया और देश को जल बचाओ का संदेश भी दिया।

Ravindra Kumar IAS
कौन है रविन्द्र कुमार-

रविन्द्र बेगूसराय जिले के चेरिया बरियारपुर प्रखंड के बसही गांव के रहने वाले हैं। नवोदय विद्यालय बेगूसराय से पढ़ने के बाद आईआईटी की पढ़ाई की। इतना ही नहीं 2011 में देश के सबसे कठिन परीक्षा यूपीएससी पास कर आईएएस ऑफिसर बन गयें।

गंगाजल लेकर एवरेस्ट पर क्यों गये-

उनका कहना है कि यह हमारे प्यारे देशवासियों के लिए एक संदेश है क्योंकि जल-प्रदूषण की समस्या अपने चरम बिन्दू पर है, इसलिए हमें जल प्रदूषण को लेकर गंभीर होने की आवश्यकता है। उनका कहना है कि गंगा पर हमारे देश की 40 प्रतिशत आबादी निर्भर है, इसलिए भी गंगाजल लेकर गये। उनका यह भी कहना है कि गंगा को शुध्द बनाने और जल संरक्षण के लिए सिर्फ सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं है। इसके लिए आम लोगों को आगे आना होगा और एकसाथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है। इसकी जरूरत इसलिए भी पड़ गयी है क्योंकि भारत की आधी आबादी को शुद्ध जल नसीब नहीं हो रहा है। वे मुख्य रुप से जल-प्रदूषण रोकने के लक्ष्य को लेकर चल रहे हैं, इसलिए उन्होंने अपने अभियान का नाम स्वच्छ गंगा, स्वच्छ भारत एवरेस्ट अभियान रखे हैं।

कहां से मिली प्रेरणा-

उनका कहना है कि जब वे सिक्किम कैडर में तैनात थे, तब उन्हें पता चला कि वहां 2011 में भूस्खलन हुआ था, जिसमें रेस्कयू के लिए पर्वतारोही को बुलाया गया था। इसी से प्रेरणा लेते हुए अपनी शौक पूरा करने के लिए पर्वत पर चढ़ने के लिए ट्रेनिंग लेना शुरु कर दिये। ट्रेनिंग के बाद माउंट-एवरेस्ट का फतह किया। इतना ही नहीं वे गंगा और पानी को स्वच्छ बनाने और बचाने के लिए तत्पर है, जिसके बिना जीवन को बचा पाना संभव नहीं है। उनका कहना है कि एक प्रशासक और भारत का नागरिक होने के नाते लोगों को जागरुक करना मेरा कर्तव्य है।

His Book
आपको बता दें कि उन्होंने एवरेस्ट पर चढ़ने की रोचक कहानियों को शब्दों में गढ़कर एक किताब छपवायें है। उस किताब का नाम है-एवरेस्ट सपनों की उड़ान सिफर से शिखर तक।