बिहार में 2014 लोकसभा चुनाव में 47 महिलाऐं उतरी थीं चुनावी मैदान में, सिर्फ 3 को मिली जीत

PATNA : देश में आधी आबादी महिलाओं की है। जो चुनाव में भी बढ़चढ़कर अपना समर्थन देती हैं। अगर चुनावी मैदान में महिलाओं की भागीदारी की बात की जाए तो इस मामले में ये बहुत पीछे आंकी जाती हैं। देश की बड़ी राजनीतिक पार्टियों द्वारा भी अधिकतर महिलाओं को लेकर प्रत्याशी के रूप में भेदभाव किया जाता है।कहीं न कहीं पुरुष प्रधान देश की कड़वी सच्चाई इसी बात से साबित भी हो जाती है। पिछले लोकसभा चुनाव में बिहार में 40 सीटों पर मात्र 47 महिलाओं ने ही अपनी दावेदारी पेश की। इतना ही नहीं इन 47 महिलाओं में से केवल 3 महिला उम्मीदवार (WOMEN CANDIDATE) ने ही जीत हासिल की।

पिछले लोकसभा चुनाव में बिहार की 40 सीटों पर 47 महिला उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतरी थीं। इन 47 महिलाओं में से केवल 3 महिलाओं को ही जीत मिली। इन 47 महिलाओं में से 36 महिलाओं को तो अपनी जमानत भी जब्त करानी पड़ गई। जिन तीन महिलाओं ने लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की उनमें से मुंगेर लोकसभा सीट से लोजपा उम्मीदवार वीणा देवी, सुपौल से कांग्रेस पार्टी की उम्मीदवार रंजीत रंजन और शिवहर लोकसभा सीट से बीजेपी उम्मीदवार रमा देवी का नाम शामिल है।

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इतना ही नहीं इन चुनावों की सबसे दिलचस्प बात यह थी कि चुनाव में सामान्य सीटों पर 37 महिलाएं चुनावी मैदान में उतरी थीं। इसमें मात्र तीन महिलाओं ने ही सफलता हासिल की थी। इन सामान्य सीटों पर 28 महिला उम्मीदवारों को अपनी जमानत तक गंवानी पड़ी थी। वहीँ बची 9 सीटों पर अनुसूचित जाति की नौ महिला उम्मीदवारों ने चुनावी मैदान में किस्मत आजमाई थी। इन 9 महिलाओं में से सात महिला उम्मीदवारों को अपनी जमानत गंवानी पड़ी थी। इसी के साथ ही 1 अनुसूचित जनजाति की महिला ने भी चुनावी मैदान में किस्मत आजमाई उस महिला को भी जनता ने नकार दिया और उन्हें भी अपनी जमानत रही गंवानी पड़ी।

जहाँ एक तरफ तो महिलाओं को बराबरी देने की बात कही जाती है वहीँ दूसरी तरफ इन महिलाओं को किसी न किसी तरह से नीचा भी दिखाया जाता है। चुनाव में भी महिला उम्मीदवार को जनता की बेरुखी का सामना करना पड़ता है। अगर महिला उम्मीदवार चुनाव में जीत भी जाए तो भी अधिकतर उसके प्रतिनिधि द्वारा ही फैसले लिए जाते हैं। ये सोच को बदलना होगा और समाज में महिलाओं की भी भागीदारी को समझना पड़ेगा।