विवादों भरा रहा है बिहार के IPS आलोक वर्मा का कॅरियर, अब तक हुए 24 तबादले, PM ने जबरन हटाया

PATNA : CBI के पूर्व डायरेक्टर आलोक वर्मा ने इंडियन पुलिस सर्विस से इस्तीफा दे दिया है। अपने इस्तीफे में उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके साथ स्वाभा‍विक न्याय नहीं किया गया और अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया। आलोक वर्मा ने डीजी फायर सर्विसेज ऐंड होमगार्ड का पद संभालने से इनकार कर दिया था। गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने उन्हें सीबीआई चीफ के पद से हटा दिया था और उनका तबादला बतौर डीजी फायर सर्विसेज ऐंड होमगार्ड कर दिया था।

कार्मिक एवं प्रशि‍क्षण विभाग को लिखे अपने लेटर में वर्मा ने कहा है कि चयन समिति ने उन्हें हटाने का निर्णय लेने से पहले अपनी बात ब्योरेवार ढंग से रखने का मौका नहीं दिया, जैसा कि सीवीसी में रिकॉर्ड हुआ था। उन्होंने कहा, ‘मुझे सीबीआई के डायरेक्टर पद से हटा दिया गया और इस प्रक्रिया में स्वाभाविक न्याय का गला घोंटा गया और पूरी प्रक्रिया को उलट-पुलट दिया गया। चयन समिति ने इस तथ्य पर विचार नहीं किया कि सीवीसी की पूरी रिपोर्ट एक ऐसे शिकायतकर्ता के आरोपों पर आधारित थी जो खुद सीबीआई जांच के घेरे में है। ‘ उन्होंने कहा, संस्थाएं हमारे लोकतंत्र की सबसे मजबूत और दृश्यवान प्रतीक हैं और यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि सीबीआई आज भारत के सबसे महत्वपूर्ण संगठनों में से है। कल का निर्णय इस बात का सबूत है कि एक संस्था के रूप में सीबीआई के साथ सरकार किस तरह का सुलूक कर रही है। वर्मा ने अपने इस्तीफे में लिखा है, ‘एक अफसरशाह के रूप में मेरे चार दशक के करियर में मैं हमेशा ईमानदारी के रास्ते पर चला हूं। आईपीएस के रूप में भी मेरा रेकॉर्ड बेदाग रहा है। मैंने अंडमान-निकोबार, पुडुच्चेरी, मिजोरम, दिल्ली में पुलिस बलों की अगुवाई की और दिल्ली कारागार तथा सीबीआई की भी अगुवाई की। मुझे इन सब बलों से अमूल्य समर्थन मिला है।’


वर्मा ने कहा, ‘यह भी गौर करने की बात है कि मैं 31 जुलाई, 2017 को ही रिटायर हो चुका हूं और 31 जनवरी, 2019 तक की अवधि के लिए सीबीआई के डायरेक्टर पद पर काम कर रहा था, जो कि निश्चित अवधि की एक भूमिका थी। मैं अब सीबीआई डायरेक्टर नहीं हूं और मैं डीजी फायर सर्विसेज, सिविल डिफेंस एवं होमगॉर्ड पद के लिए रिटायरमेंट की उम्र पार कर चुका हूं। इसलिए मुझे आज से ही रिटायर मान लिया जाए।’ गुरुवार को जब सीबीआई के डायरेक्टर की नियुक्ति करने वाली चयन समिति की बैठक हुई थी तो इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ए के सीकरी और कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल थे।

विवादों भरा रहा है बिहार निवासी आईपीएस आलोक वर्मा का कॅरियर, अब तक हुए 24 तबादले : वर्ष 1979 बैच के अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम और यूनियन टेरेटरी कैडर के आईपीएस अधिकारी आलोक कुमार वर्मा का कॅरियर विवादों भरा रहा है। नौकरी करते हुए आलोक वर्मा की 24 बार पोस्टिंग हो चुकी है। मालूम हो कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई में तीन सदस्यीय पैनल ने आलोक वर्मा के नाम को सीबीआई चीफ के तौर पर मंजूरी दी थी। इस पैनल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, तत्कालीन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जेएस खेहर और लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल थे। अब प्रधानमंत्री द्वारा आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।

साफ-सुथरी छविवाले आईपीएस अधिकारी माने जानेवाले आलोक वर्मा मूलरूप से बिहार के रहनेवाले हैं। बिहार के तिरहुत प्रमंडल के शिवहर जिला निवासी आलोक कुमार वर्मा मात्र 22 वर्ष की उम्र में वर्ष 1979 में आईपीएस चुन लिये गये थे। 14 जुलाई, 1957 को जन्मे आलोक वर्मा ने 22 वर्ष की उम्र में ही आईपीएस चुने गये थे। वह अपने बैच के सबसे कम उम्र के अभ्यर्थी थे। हालांकि, उनकी शिक्षा दिल्ली में हुई है। उन्होंने सेंट जेवियर स्कूल से पढ़ाई पूरी करने के बाद सेंट स्टीफन कॉलेज से उन्होंने इतिहास में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की।


बिहार के चर्चित सृजन घोटाले को लेकर कर चुके हैं पटना का दौरा : सीबीआई चीफ बनने के बाद आलोक कुमार वर्मा बिहार के चर्चित सृजन घोटाले को लेकर कार्रवाई तेज करते हुए पटना का दौरा भी कर चुके हैं। मालूम हो कि सृजन घोटाला शुरुआती जांच में 200 करोड़ तक का था। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, रकम भी बढ़ती गयी। यह रकम 1300 करोड़ से पार हो गयी है। भागलपुर से शुरू हुए सृजन घोटाले की आंच का दायरा बांका, सुपौल, सहरसा तक पहुंच गया।

बीबीसी की डाक्यूमेंट्री ‘इंडियाज डॉटर’ को लेकर भी हुआ था विवाद : साफ-सुथरी छवि वाले आइपीएस अधिकारी माने जानेवाले आलोक कुमार वर्मा को लेकर उस समय भी विवाद गहराया था, जब 16 दिसंबर, 2012 को दिल्ली में हुए निर्भया कांड को लेकर बीबीसी ने एक डाक्यूमेंट्री ‘इंडियाज डॉटर’ बनायी थी। ‘इंडियाज डॉटर’ डाक्यूमेंट्री के लिए बीबीसी ने तिहाड़ जेल में बंद निर्भया कांड के आरोपित का इंटरव्यू लिया था। इसके बाद विवाद गहराने पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने तिहाड़ जेल के तत्कालीन महानिदेशक आलोक कुमार वर्मा को तलब भी किया था। हालांकि, निर्भया कांड के दोषी का इंटरव्यू करने की अनुमति तत्कालीन डीजी विमला मेहरा ने दी थी।

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