नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ महापर्व चैती छठ, उदीयमान सूर्य को अर्घ्य के साथ संपन्न होगा अनुष्ठान

PATNA: आज से महापर्व चैती छठ का अनुष्ठान गंगा स्नान के साथ शुरू हो गया है। चार दिन चलने वाले इस महापर्व की शुरुआत गंगा स्नान के साथ हुई है। इस पर्व में महिलाओं ने आज व्रत रखने के साथ गंगा स्नान कर पहले दिन की पूजा शुरू कर दी है। व्रत के पहले दिन कद्दू के प्रसाद का काफी महत्त्व है। कद्दू के प्रसाद से भगवान् का भोग लगाया जाता है। उसके बाद घर-परिवार के अन्य सदस्य भी प्रसाद ग्रहण करते हैं।

चार दिन चलने वाले इस पर्व में दूसरे दिन छठव्रती खरना की पूजा करेंगी। जिसके बाद अगले दिन गुरूवार को पूजा में सूर्य देवता को पहला अर्घ्य दिया जाएगा। इस पर्व में पूजा के अंतिम दिन उदयीमान भगवान सूर्य को अर्घ्य के देकर पूजा संपन्न की जाएगी। इस पर्व शुरुआत हिन्दू नववर्ष के पहले महीने चैत्र के शुक्ल पक्ष की षष्ठी से होती है। इस पर्व में व्रती सूर्य देवता की उपासना करती हैं। सूर्य देवता की पूजा कर व्रती महिलाऐं आरोग्यता, संतान और मनोकामनाओं की पूर्ति का आर्शीवाद मांगती हैं।

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इस महापर्व के अंतिम दिन सूर्य देवता को सायंकालीन अर्घ्य 11 और12 अप्रैल को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। पूजा के पहले दिन व्रती महिलाऐं लौकी की सब्जी और अरवा चावल का प्रसाद ग्रहण करेंगी। छठ पूजा का बिहार में खास महत्त्व माना जाता है। वैदिक मान्यता के अनुसार इस पूजा से पुत्र की प्राप्ति होती है तो वहीँ वैज्ञानिक नजरिए की बात करें तो कहा जाता है कि पूजा से गर्भाशय मजबूत होता है।

बता दें कि बिहार में चैती छठ पूजा को भी कार्तिक छठ पूजा की तरह ही मनाया जाता है। चैती छठ पूजा को ज्यादा बड़े स्तर पर नहीं मनाया जाता है। इस पूजा में भी डाला पर ठेकुआ के साथ ही फल और मेवों का प्रसाद चढ़ाया जाता है। छठ पूजा को मुख्य रूप से पूर्वी भारत में बढ़ चढ़ मनाया जाता है।