मुझे पूर्ण विश्वास है, बिहार को आज नहीं तो कल विशेष राज्य का दर्जा मिलेगा-सीएम नीतीश कुमार

PATNA: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोक संवाद कार्यक्रम के दौरान कहा कि आज नहीं तो कल बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिलेगा। इसके लिए हमलोग लगातार प्रयासरत हैं। नीतीश ने कहा कि विशेष राज्य के दर्जे के बारे में 15वीं वित्त आयोग से भी बात हुई। इतना ही नहीं, हमलोग लगातार इस मुद्दे को वित्त आयोग के समक्ष उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नीति आयोग की बैठक में हम शामिल होंगे और विशेष राज्य के दर्जे की मांग को एकबार फिर से उठाएंगे।

आपको बता दें कि पिछले वित्त आयोग ने विशेष राज्य के दर्जा देने पर रोक लगा दिया था। इसपर नीतीश कुमार ने कहा कि मैं लगातार अपनी समस्याओं से आयोग को अवगत करा रहा हूं। इतना ही नहीं, बिहार को क्यों विशेष राज्य का दर्जा दिया जाए, इस कारणों से भी आयोग को अवगत करा रहा हूं।

 विशेष राज्य-

अबतक कुल 11 राज्यों के पास विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त है, जिसमें असम, जम्मू-कश्मीर, नागालैंड, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, सिक्किम त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश मिजोरम और उत्तराखंड शामिल है।

विशेष राज्य का क्या फायदा-

जिस राज्य को विशेष राज्य का दर्जा मिलता है, उसे केंद्र से मात्र 10% कर्ज के रूप में और 90% वित्तीय सहायता के रुप में मिलता है। कहने का मतलब है कि अगर विशेष राज्य को केन्द्र सरकार ने 100 रुपया दिया तो उसमें सिर्फ 10 रुपया पर ही ब्याज चलेगा और राज्य को लौटाना पड़ेगा। शेष 90 रुपया केन्द्र की तरफ से राज्य को तोहफे के रुप में मिल जाता है, जिसपर ना ब्याज देना है और ना ही उसे वापिस केन्द्र को देना है। इसके अलावा भी कई फायदे हैं।

वहीं अगर केन्द्र सरकार सामान्य राज्य को 100 रुपया देती है तो 60 रुपये पर ब्याज देना पड़ेगा और वापिस केन्द्र को लौटाना भी पड़ेगा। उसमें से सिर्फ 40 रुपया तोहफे के रुप में मिलेगा जबकि विशेष राज्य को 90 रुपये। इसी फायदे को देखते हुए पिछड़े राज्य विशेष राज्य के दर्जे की मांग को समय-समय पर उठाते रहते हैं, लेकिन केन्द्र सभी राज्य को यह दर्जा नहीं दे सकती है। इसके लिए एक मानक तय किया गया है, जिसे गाडगिल फार्मूला कहते हैं।

शर्ते क्या है-

विशेेष राज्य का दर्जा गाडगिल फार्मूले के अनुसार मिलता है। इसके अनुसार उस राज्य में पहाड़ी इलाका और दुर्गम क्षेत्र ज्यादा हो, आबादी का घनत्व कम हो लेकिन जनजातियों की आबादी का अधिक हो, पड़ोसी देशों से बोर्डर सटा हो, सामरिक क्षेत्र में स्थित हो, आर्थिक एवं आधारभूत संरचना में पिछड़ा हो और आय का कोई निर्धारित साधन या संसाधन नहीं हो। इतने शर्तों को पूरा करने के बाद ही किसी भी राज्य को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाता है। यही सब कारण है कि बिहार और झारखंड को यह दर्जा नहीं मिला है क्योंकि दोनों  राज्य सभी शर्तों को पूरा नहीं कर पाते हैं।