भाजपा-जदयू में पड़ सकती है दरार, सुशील मोदी और सीएम नीतीश में बढ़ने लगी है दूरियां

PATNA: लोजपा के कार्यालय में उसके तरफ से दी जा रही इफ्तार पार्टी में सीएम नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी शामिल हुए, लेकिन सुशील मोदी से नीतीश ने हाथ तक नहीं मिलाया। हालांकि पार्टी के अंत तक लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान ने दोनो को जबरदस्ती गले मिलवा दिया.

क्यों बढ़ रही है दूरियां-

30 मई को राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री सहित 57 मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता का शपथ दिलाये, जिसमें जदयू के एक भी मंत्री शामिल है। आपको बता दें कि भाजपा ने जदयू को एक मंत्री पद देने की पेशकश की थी, लेकिन जदयू का कहना था कि लोजपा छह सीटें जीती है और उसे एक मंत्री पद मिला है तो 16 सीटें जीतने वाले जदयू को कम-से-कम तीन मंत्री पद मिलना चाहिए। भाजपा ने नीतीश के इस प्रस्ताव को नहीं स्वीकारा, जिसके कारण नीतीश मोदी के मंत्रिमंडल में अपना सांसद नहीं भेजा। इसके बाद से नीतीश के चेहरे पर नाराजगी को देखा जा सकता है।

गौरतलब है कि बिहार में जदयू, एनडीए के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ रही थी, जिसमें भाजपा और रामविलास पासवान की पार्टी लोजपा भी शामिल है। कुल 40 लोकसभा सीटों में 17 भाजपा, 16 जदयू और 6 लोजपा जीती थी। वहीं महागठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा था।

इसके बाद नीतीश ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया, जिसमें 8 नये मंत्री बनें, लेकिन उसमें भाजपा के एक भी विधानसभा सदस्यों को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं दिया। इसे देखकर लोगो का कहना है कि ऐसा करके नीतीश ने भाजपा और मोदी से अपना बदला ले लिया। इसके बाद से ही महागठबंधन के कुछ नेताओं के साथ नीतीश को देखा जाने लगा है, जिससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि नीतीश एकबार फिर से महागठबंधन में शामिल हो सकते हैं।

जीतनराम मांझी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने भी यह संकेत दे दिया है कि अगर नीतीश महागठबंधन में शामिल होना चाहते हैं तो पार्टी के तमाम नेता विचार करेंगे।