मोदी सरकार के खिलाफ कांग्रेस का आंदोलन फ्लॉप, बिहार के संगठन ने नहीं दिखाई रुचि

PATNA : हर एक मोर्चे पर भाजपा से लगातार मात खाने वाली कांग्रेस एक बार फिर मोदी सरकार को घेरने में नाकाम हो गयी है। पांच नवंबर से कांग्रेस ने बिहार में भाजपा के खिलाफ एक आंदोलन करने की योजना बनाई थी लेकिन ये आंदोलन कमजोर संगठन एवं शीर्ष नेताओं के असहयोग के कारण फ्लॉप साबित हो गया।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी केंद्र सरकार की नीतियों पर दो पृष्ठों का पर्चा प्रकाशित किया था, जिसका शीर्षक ‘भयंकर बेरोजगारी, बेहाल अर्थव्यवस्था, कृषि संकट एवं आरसेप: एक कड़वा सत्य’ रखा है। इसमें बेरोजगारी, गिरती अर्थव्यवस्था, कृषि संकट एवं आरसेप पर विस्तार से चर्चा की गई है। ये पर्चा तक लोगों में नहीं बांटा जा सका।

पार्टी नेताओं के मुताबिक जिला स्तर पर भी पर्यवेक्षक नियुक्त होने थे, मगर जिला पर्यवेक्षकों की सूची बुधवार को जारी की गई। जबकि, अभियान एक दिन पूर्व मंगलवार को ही आरंभ हुआ। जिला पर्यवेक्षकों को अपनी रिपोर्ट 18 नवंबर तक प्रदेश कार्यालय भेज देने की हिदायत दी गई है। एक जिला पर्यवेक्षक ने गुरुवार की शाम में बताया कि व अभी पटना में हैं, शुक्रवार को वे उस जिले में जा रहे हैं, जहां के लिए पर्यवेक्षक बनाए गए हैं।

इस आंदोलन की समीक्षा के लिये वाराणसी के पूर्व सांसद राजेश मिश्रा को पर्यवेक्षक बनाया है। पांच नवंबर से आरंभ हुआ यह आंदोलन 15 नवंबर तक चलेगा लेकिन कार्यकर्ताओं के वर्तमान उत्साह को देखते हुए ये असफल प्रतीत होता है। आपको बता दें कि पहले ही कांग्रेस बिहार में नातृत्व के संकट से जूझ रही है, अब इस फ्लॉप आंदोलन के बाद कार्यकर्ता और अधिक आशाहीन हो गये हैं। कांग्रेस नेता आनंद माधव ने कहा कि हमारा पूरा फोकस अभी 11 नवंबर की रैली की तैयारी पर है।