सरकार के 'लापरवाही' से बिहार में आती है बाढ़, हरेक साल अरबों रुपए का होता है घोटाला

सरकार के 'लापरवाही' से बिहार में आती है बाढ़, हरेक साल अरबों रुपए का होता है घोटाला

By: Roshan Kumar Jha
July 07, 09:07
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PATNA : बिहार में एक बार फिर से बाढ़ के चपेट में त्राहिमाम कर रहा है। कोसी मैया ने अपना तांडव दिखाना आरम्भ कर दिया है। दरभंगा, मुधबनी, सहरसा, सुपौल, कटिहार, अररिया सहित कई जिले बाढ की पानी से घिर गया है। पिछली बार हमने आपको उत्तर बिहार की नदियों के सबसे बड़े एक्सपर्ट दिनेश मिश्र सर का वह आलेख पढाया था जिसमे एक मंत्री ने कहा था कि बांध टूटता है तो मैं त्यागपत्र दे दुंगा। आज दिनेश मिश्र ने फिर एक बात कही है जिस पढकर यह कहने में कोई संदेह नहीं रहेगा कि बिहार में बाढ़ सरकारी लापरवाही से आती है। बाढ़ राहत के नाम पर हरेक साल अरबों रुपए का घोटाला होता है। परिणाम फिर भी निराश करने वाला होता है। स्थिति स्पष्ट है। राज्य की नीतीश सरकार से लेकर केंद्र की मोदी सरकार भी नहीं चाहती है कि बिहार में बाढ़ का स्थायी निदान हो। 

क्या कहते हैं दिनेश मिश्रजी...
विधायक रामदास राय ने सदन में कहा कि,’मैं पिछली बार भी इस विषय पर बोला था, लगातार बोल रहा हूँ लेकिन आज नेपाल की सरकार से इस विषय पर वार्ता करने या बाढ़ की विभीषिका रोकने की व्ययवस्था किस तरस से हो, इस दिशा में सरकार ने कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। अंतिम निर्णय न लेने के कारण पूरा उत्तर बिहार नेपाल के पानी से जल-प्लावित होता रहता है और हज़ारों लोग बाढ़ से प्रभावित होकर मारे जाते हैं। कुछ तो सकारात्मक काम हम करें ताकि जो बिहार के लोग इस व्यवस्था से जूझ रहे हैं उन्हें कुछ निजात इस समस्या से दिलाई जा सके।”

उन्होंने आगे कहा कि,‘“गंडक बाँध के तीन फुट ऊपर से पानी बह जाता है। कौन इंजीनियर योजना बनता है जो बाँध इतना नीचे रह गया? कहीं कहीं बोल्डर सप्लाई करने की जरूरत है। बोल्डर नहीं देने से बाँध मजबूत नहीं होगा। देवापुर में आज क्या हो गया? वहाँ से लेकर बैकुंठपुर, मशरख, तरैया, मढ़ौरा, गरखा क्षेत्रों में गंगा नदी आ जाती है। उन क्षेत्रों में लोग बाढ़ की विभीषिका में डूब जाते हैं। यह क्षेत्र है उन लोगों का जो किसान हैं, मजदूर हैं जिन्होनें आपके हाथों को मजबूत किया है। वह ढकना लेकर घूमें रिलीफ के लिए? जहां की ज़मीन गेहूं पैदा करती है वहां के लोग गेहूं के लिए भीख मांग रहे हैं, उसके लिए तरस रहे हैं। आज हमारे लोग पंजाब जा रहे हैं जहां उनकी किडनी निकाली जा रही है क्योंकि हमारे घर में काम नहीं है, यहाँ गेहूं नहीं बोया गया, धान डूब गया। ईख समाप्त हो गई, चीनी मिलें गायब हो गईं हैं।” उन्होनें सरकार के सारे विभागों के बजट को काटने के लिया सरकार से कहा बस केवल इंसानियत के बजट को छोड़ कर।”

कभी सोचा किसी ने कि नेपाल में हाई डैम की मांग हर साल होती है, हर पार्टी के सदस्य करते हैं तथा कोई भी ऐसी पार्टी नहीं बची है जिसने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बिहार और दिल्ली में शासन ने किया हो और कभी-कभी तो दोनों स्थानों पर एक ही पार्टी का शासन रहा है फिर भी काम कुछ नहीं होता है। अगर यही बिहार की बाढ़ समस्या का समाधान है तो यह कब हो पाएगा और अगर कोई दूसरा समाधान है तो उस पर कब विचार होगा। अगर इसमें कोई बाधा है तो उसके बारे में आमजन को जानकारी होनी चाहिए। समय आ गया है कि बांध के विकल्प पर चर्चा शुरू हो।
 

 

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