वृक्षारोपण कर दरभंगा की निशा ने दांपत्य जीवन में किया प्रवेश, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

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PATNA : मिथिला में विवाह के अवसर पर आम और महुआ के वृक्ष के पूजन की सदियों पुरानी परंपरा आज भी कायम है। सामाजिक व पौराणिक मान्यताओं का निर्वहन करती इस परंपरा में कहीं न कहीं पर्यावरण संरक्षण का भाव भी सहज ही निहित है। इसी तरह मिथिला की वैवाहिक रस्म-ओ-रिवाज में नवविवाहित युगल जोड़ी द्वारा शादी के चौथे दिन चतुर्थी पूजन के बाद विवाह की रस्म को पूर्ण होना माना जाता है और इसके बाद नवल जोड़ी विधिवत दांपत्य जीवन में कदम रखते हैं।

मिथिला की वर्षों पुरानी मान्यताओं का अनुसरण करते हुए विशौल (टटुआर) निवासी सुशील कुमार झा की इंजीनियर पुत्री निशा भारती एवं बनसारा (मधुबनी) निवासी उनके इंजीनियर पति प्रभाष कुमार ने रविवार को अपनी शादी के चौथे दिन चतुर्थी पूजन उपरांत सोतीलाइन, दरभंगा में अवस्थित विद्युत विभाग के अतिथिशाला में स्थित विवाह स्थल पर आम और महुआ का वृक्ष लगाकर दांपत्य जीवन में प्रवेश करते हुए पर्यावरण संरक्षण का अनुकरणीय संदेश दिया।

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इस मौके पर नव दंपति ने बताया कि छात्र जीवन से ही वे दोनों राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़े रहे हैं और पर्यावरण संरक्षण के निमित्त उन लोगों ने निश्चय किया कि जिस आम और महुआ के पूजन के साथ विवाह रस्म शुरू होने की मिथिला में परंपरा रही है, विवाह स्थल पर इस युगल वृक्ष को लगाकर वे दोनों अपने दांपत्य जीवन की विधिवत शुरुआत करेंगे। नवविवाहिता द्वारा उठाए गए इस कदम की चारों ओर प्रशंसा हो रही है। इस अवसर पर वरिष्ठ कवि हरिश्चंद्र हरित, तारा कांत झा प्रवीण कुमार झा, सुनील कुमार झा, प्रभंजना झा, रीता झा, शिखा झा आदि की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।