सीमांचल के ‘धरतीपकड़’ हैं अशोक कुमार साह, लड़ चुके हैं सात चुनाव, किराये से चलता है परिवार

PATNA : धरतीपकड़ अर्थात वह आदमी जो सिर्फ चुनाव लड़ता था। जो इस बात से बेफिक्र रहता था कि वह चुनाव जीत रहे हैं या हार रहे हैं। वह तो बस चुनाव लड़ना जानते थे। इस चुनावी समय में आज हम आपको बिहार के एक धरतीपकड़ से मिलवाने जा रहे हैं।

पूर्णिया के अशोक कुमार साह सीमांचल के ‘धरतीपकड़’ हैं। पिछले तीस वर्षों में वह सात बार विस से लेकर लोस चुनाव में किस्मत आजमा चुके हैं। हर बार जमानत जब्त होती है। बावजूद चुनाव लड़ने का फितूर कम नहीं हुआ है। वर्ष 2019 के लोस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में खड़े हुए अशोक कुमार साह की चुनाव में भाग्य आजमाने की एक लम्बी फेहरिस्त है। हालांकि अब तक के चुनावों में कभी भी इन्हें जीत नहीं मिली, लेकिन अपने चुनाव लड़ने के अभियान को कभी रोका नहीं और लगातार चुनाव मैदान में भाग्य आजमाते रहे हैं। यही कारण है वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में अपने पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा से चुनाव चिह्न नहीं मिलने के कारण निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव में उतरे हैं।

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वह बताते हैं कि वर्ष 1989 से चुनाव लड़ने का सिलसिला शुरू किया। झारखंड मुक्ति मोर्चा से वर्ष 1989 के विस चुनाव में ठाकुरगंज, 1995 में प्राणपुर विस से वर्ष 2000 में उदाकिशुनगंज विस से चुनाव मैदान में उतरे। 2004 में फिर कसबा विस क्षेत्र से चुनाव मैदान में कूदे। विस में लगातार शिकस्त मिलने के बावजूद हौसला कम नहीं हुआ। इसके बाद वर्ष 1999 व 2009 में लोस चुनाव लड़े। अब 2019 के चुनाव में भी वह निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में हैं।

अशोक साह की उम्र 64 साल है। वह प्राइवेट शिक्षक हैं। 1971 में उन्होंने मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण की। लाइन बाजार शिवमंदिर के समीप इनका अपना मकान हैं। इसके किराये से उनका परिवार चलता है। चुनाव के दौरान साइकिल से प्रचार करते हैं। चुनाव के चार दिन पहले वह चार पहिया वाहन से प्रचार करते हैं।